जयपुर। राजस्थान में इस साल होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर बीजेपी और कांग्रेस सहित सभी राजनीतिक पार्टियों ने कमर कस ली है। बीजेपी बीते दिनों से मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर चर्चाएं हो रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चित्तौड़गढ़ की सभा में यह ऐलान कर दिया था कि राजस्थान में कमल का फूल ही बीजेपी का चेहरा होगा। पीएम मोदी का यह बयान वसुंधरा राजे के समर्थकों को रास नहीं आ रहा है। राजे समर्थकों के अलावा राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पूर्व की अनदेखी पार्टी के लिए नुकसान दायक हो सकती है। वसुंधरा राजे से बड़ा चेहरा राजस्थान में नहीं है।

राजे के बिना बीजेपी कभी नहीं आ सकती सत्ता में
वसुंधरा राजे के कट्टर समर्थक और जोधपुर भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष भोपालसिंह ने दावा किया है कि राजस्थान में बिना किसी चेहरे के बीजेपी कभी भी सत्ता में नहीं आ पाई है। लिहाजा, इस बार भी बीजेपी के लोकप्रिय चेहरे के रूप में वसुंधरा राजे का नाम सबसे आगे है। वसुंधरा राजे ही आने वाले विधानसभा चुनाव में निर्णायक भूमिका में होंगी। वहीं जोधपुर के शेरगढ़ से पूर्व विधायक बाबूसिंह राठौड़ ने भी दावा किया है कि वसुंधरा राजे ही बीजेपी की एक ऐसी नेता है, जिनकी राजस्थान की 200 विधानसभा क्षेत्रों में गहरी पैठ है।

प्रदेश में राजे सबसे ज्यादा लोकप्रिय चेहरा
बीते दिनों चित्तौड़गढ़ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा में शामिल होने के बाद वसुंधरा राजे सीधे अपने दो दिवसीय दौरे पर बाड़मेर पहुंची थीं। इस दौरान वसुंधरा राजे के समर्थकों ने उनका गर्मजोशी के साथ स्वागत करते हुए दावा किया था कि बीजेपी बिना किसी चेहरे के कभी जीत दर्ज नहीं कर पाई है। चाहे भैरोसिंह शेखावत का चेहरा हो या फिर वसुंधरा राजे का। आज के समय में राजस्थान बीजेपी में सबसे ज्यादा लोकप्रिय चेहरा वसुंधरा राजे का ही है। लिहाजा, आने वाले विधानसभा चुनाव में वसुंधरा राजे की एक अहम भूमिका होगी।

राजे ही बीजेपी को निर्णायक भूमिका में ला सकती हैं
शेरगढ़ से बीजेपी के पूर्व विधायक बाबू सिंह राठौड़ ने कहा कि सीएम का चेहरा तो संसदीय बोर्ड तय करता है, लेकिन राजस्थान में दो बार की मुख्यमंत्री रहीं वसुंधरा राजे वर्तमान में बीजेपी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। साथ ही राजस्थान में सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं। इसका नजारा बाड़मेर में देखने को मिल सकता है। वसुंधरा राजे ही बीजेपी को निर्णायक भूमिका में ला सकती हैं।

वसुंधरा की अनदेखी पड़ सकती है भारी
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि वसुंधरा राजे की अनदेखी पार्टी के लिए नुकसान दायक हो सकती है। वसुंधरा राजे से बड़ा चेहरा राजस्थान में नहीं है। सभी सर्वे में वसुंधरा राजे ही सीएम अशोक गहोलत को बराबर की टक्कर दे रही है। वसुंधरा राजे की समाज के सभी वर्गों में गहरी पकड़ है। विश्लेषकों का कहना है कि वसुंधरा राजे को साइडलाइन करने से पार्टी को चुनाव में खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। एक बड़ा वर्ग वसुंधरा राजे का समर्धक माना जाता है। वह छिटक सकता है।

बाबोसा के बाद 20 साल पहले शुरू हुआ था ‘वसुंधरा युग’
तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोसिंह शेखावत 1977 के पश्चात वर्ष 1990 तथा 1993 में लगातार दो बार इस पद पर रहे। वर्ष 1998 के चुनाव में कांग्रेस को सफलता मिली और अशोक गहलोत ने पहली बार शासन सत्ता की बागडोर संभाली। वर्ष 2003 के चुनाव में पहले भाजपा में वसुंधरा राजे ने चारभुजा मंदिर से परिवर्तन यात्रा का आगाज किया।