जयपुर। राजस्थान में विधानसभा चुनाव 2023 के लिए 25 नवंबर को 75.45 प्रतिशत वोटिंग हुई। 3 दिसंबर को रिजल्ट आने के बाद साफ हो जाएगा कि प्रदेश में भाजपा सरकार बनाएगी या कांग्रेस। विधानसभा चुनाव 2023 के रिजल्ट को गुरुवार शाम लेकर 8 एग्जिट पोल आए। इन 8 एग्जिट पोल्स में 5 ने भाजपा को विजयी घोषित किया है। बाकी ने कांग्रेस को कहा कि वह रिवाज तोड़गी। टाइम्स नाउ – ईटीजी के एग्जिट पोल ने अनुमान जताया है कि इस बार भाजपा राजस्थान की सत्ता पर राज करेगी। भाजपा को 108-128 सीटें मिलेंगी वहीं कांग्रेस को 56-72 सीटें ही मिलेंगी। अन्य 13-21 के बीच संतुष्ट रहेंगे।

वसुंधरा ने BJP खेमे से बटोरी सबसे अधिक सुर्खियां
कांग्रेस की ओर से चुनावी मैदान में सबसे ज्यादा दारोमदार मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के कंधों पर था। दूसरी तरफ भाजपा खेमे से शुरुआत में पूर्व सीएम वसुंधरा राजे को साइडलाइन किए जाने की चर्चा तो चली लेकिन चुनावी प्रचार अभियान खत्म होते-होते वसुंधरा फिर से मेनलाइन में आ गईं। इस चुनावी अभियान में भाजपा खेमे से वसुंधरा राजे ने सबसे अधिक सुर्खियां बटोरी। इसके कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं।

परिवर्तन यात्रा में नहीं कम नजर आईं राजे
200 सीटों पर विधानसभा चुनाव के ऐलान के पहले भाजपा ने पूरे प्रदेश में परिवर्तन यात्रा निकाली। इस यात्रा ने सभी सीटों को कवर किया। इसमें भाजपा के केंद्रीय नेता- जेपी नड्डा, अमित शाह, राजनाथ सिंह, नितिन गड़करी और अंतिम दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नजर आए। इस यात्रा में राजस्थान के भाजपा नेताओं में प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी, नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़, पूर्व अध्यक्ष सतीश पूनिया, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, अर्जुन राम मेघवाल सहित अन्य नेता तो खूब नजर आए। लेकिन वसुंधरा राजे बहुत कम दिखी थी।

पहली लिस्ट ने भी वसुंधरा को नकारा
चुनाव की घोषणा के बाद जब भाजपा ने प्रत्याशियों की पहली लिस्ट जारी की, तब भी राज्य की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के दबदबे को नकारा गया। इस लिस्ट में भाजपा ने वसुंधरा के कई समर्थकों के टिकट काटे। सांसदों को विधायकी के चुनावी मैदान में उतारने सहित कई बड़े फैसले लिए। पहली लिस्ट जारी होने के बाद भाजपा द्वारा घोषित प्रत्याशियों का अलग-अलग जिलों में अपनी ही पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा जमकर विरोध हुआ।

पहली लिस्ट में भाजपा ने बदला पैटर्न
प्रत्याशियों की पहली लिस्ट पर हुए विरोध के बाद भाजपा ने पैटर्न बदलना पड़ा। दूसरी-तीसरी के बाद अंत तक घोषित सभी उम्मीदवारों में वसुंधरा राजे की राय चली। उनके समर्थकों को टिकट दिया गया। पहली लिस्ट में वसुंधरा के करीबी नरपत सिंह राजवी का टिकट काट दिया गया था। लेकिन बाद में भाजपा ने उन्हें चित्तौड़गढ़ से चुनावी मैदान में उतारा। फिर पार्टी की हर बैठक में वसुंधरा फ्रंट से लीड करती नजर आई।

साइडलाइन की चर्चा के बीच शांत होकर जनता से किया संपर्क
राज्य में चुनाव के बीच जब वसुंधरा को साइडलाइन किए जाने की बात चल रही थी तब वसुंधरा खुद शांत थी। वो समझदार राजनेता की तरह अपने तरफ से बिना कुछ बोले शांति से लोगों के संपर्क में बनी रही। परिवर्तन यात्रा की शुरुआत से एक दिन पहले वसुंधरा राजे देवदर्शन यात्रा पर निकली। प्रदेश के चार अलग-अलग जिलों में स्थित मंदिरों में पूजा की। वसुंधरा जहां भी गई उन्हें जनता का भरपूर प्यार मिला। इससे महारानी का हौसला बढ़ा और फिर चुनावी अभियान में वसुंधरा ने कुछ ऐसा किया वो भाजपा खेमे की नंबर-1 नेता बन गई।

जमीनी स्तर तक किया काम
राजस्थान की दो बार मुख्यमंत्री रहीं वसुंधरा राजे की भाजपा संगठन में पकड़ किसी से छिपी नहीं है। उन्होंने इस चुनाव की शुरुआत हल्के तौर पर की हो लेकिन एक रणनीति के तहत काम करते हुए अंत में वो पुराने रूप में नजर आ रही हैं। वसुंधरा ने इस चुनाव में जमीनी स्तर पर काम किया। स्थानीय कार्यकर्ताओं से सीधा संपर्क बनाया। जितना संभव हो सका, उतने लोगों तक पहुंच बनाई। चुनावी अभियान में भी वसुंधरा राज्यभर के हर क्षेत्र तक पहुंचीं। पार्टी के सीनियर नेताओं से शिकायत किए बिना वो लोगों से संपर्क बनाने में जुटी रहीं।

करीब 60 चुनावी सभाएं राजे ने की
वसुंधरा राजे ने भाजपा खेमे से सबसे अधिक चुनावी सभाएं की। वसुंधरा राजे ने करीब 60 चुनावी जनसभाएं कीं। राज्य में प्रमुख उम्मीदवारों के समर्थन में चुनावी सभाएं कीं। इस दौरान कांग्रेस सरकार और उनकी विफलताओं को खूब उजागर किया। साथ ही राजे ने राज्य के सभी समुदायों के साथ जुड़ने की कोशिश भी की. झालावाड़, हनुमानगढ़, बिलवाड़ा, बीकानेर, अनूपगढ़, राजगढ़ सहित अन्य जगहों पर हुई चुनावी सभाओं में वसुंधरा भारी भीड़ जुटाने में सफल रहीं।

सीएम फेस की पहली पसंद
राजस्थान में मतदान से पहले हुए ओपिनियन पोल में भी वसुंधरा राजे को भाजपा की ओर से बतौर मुख्यमंत्री सबसे ज्यादा पंसद किया गया। भाजपा-कांग्रेस दोनों दलों को मिला दें तो मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए सीधी फाइट गहलोत और वसुंधरा में ही दिखी। पायलट तीसरे स्थान पर दिखे। राज्य के सियासी पंडितों की माने तो 3 दिसंबर को आने वाला रिजल्ट वसुंधरा का राजनीतिक भविष्य तय करेगा।