जयपुर। राजस्थान में कोरोना वायरस के लगातार बढ़ते मामलों के चलते ग्राम पंचायत चुनाव-2020 के चौथे चरण पर एक बार फिर अब आशंकाओं के बादल मंडराने लगे हैं। कोरोना संक्रमण की प्रदेश में गंभीर होती स्थिति को देखते हुए अब जुलाई महीने में घोषित होने वाला संभावित चुनावी कार्यक्रम स्थगित हो सकता है। पंचायत चुनाव के चौथे चरण की तारीखों का ऐलान कब होगा, इस पर अभी कोई बोलने को तैयार नहीं है, जबकि ग्रामीण मतदाताओं के साथ ही सरपंच का चुनाव लड़ने के इच्छुक लोगों को बेसब्री से चुनावी तारीखों की घोषणा होने का इंतजार है। प्रदेश में चौथे चरण में 3,878 ग्राम पंचायतों में चुनाव होने हैं।

चुनाव आयोग की तैयारी पूरी
प्रदेश में कोरोना के बढ़ते केसों ने 3,878 भावी सरपंचों को मायूस कर दिया है। हालांकि, ग्राम पंचायत चुनाव के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने अपनी चुनावी तैयारियां पूरी कर ली हैं। 10 जून को मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन भी कर दिया गया है। पहले आयोग की मंशा जुलाई के पहले सप्ताह में चुनाव कार्यक्रम घोषित करने की थी, लेकिन प्रदेश में कोरोना वायरस के बढ़ते केसों से राज्य निर्वाचन आयोग पसोपेश में है। चौथे चरण के तहत प्रदेश की 3,878 ग्राम पंचायत, पंचायत समितियों और जिला परिषद के चुनाव कराना प्रस्तावित है। इनका कार्यकाल बहुत पहले ही समाप्त हो गया था और सरकार ने अब यहां प्रशासक लगा रखे हैं।

ये होगी बड़ी चुनौती
आयोग से जुड़े सूत्रों की माने तो जिस तरह से प्रदेश में कोरोना के मामले बढ़ते जा रहे हैं ऐसे में अभी चुनाव कराना संक्रमण को और निमंत्रण देना है क्योंकि ग्रामीणों में मतदान को लेकर खासी उत्सुकता रहती है। ग्रामीण मतदाता मतदान में बढ़-चढकर हिस्सा लेते हैं, ऐसे में सोशल डिस्टेंसिंग की पालना कराना एक बड़ी चुनौती होगी।

ग्रामीणों को है बेसब्री से इंतजार
प्रदेश के 3,878 भावी सरपंच अब चुनाव कार्यक्रम घोषित होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। ग्रामीण मतदाताओं की निगाहें आयोग के निर्णय पर टिकी हैं, लेकिन आयोग कशमकश की स्थिति में है कि राज्य में चुनाव कार्यक्रम कब घोषित किया जाए। आयोग ने अप्रैल महीने में चौथे चरण का चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया था। लेकिन कोरोना के चलते इसे स्थगित कर दिया गया था। इसके बाद आयोग तय नहीं कर पा रहा है कि ग्राम पंचायत चुनाव कब करवाए जाएं। आयोग प्रदेश में 3 चरणों के तहत करीब 8000 ग्राम पंचायतों के चुनाव आयोग करवा चुका है। पंचायत चुनाव के तीन चरणों 80 फीसदी से ज्यादा वोटिंग हो चुकी है दर्शाता है कि ग्रामीण मतदाता मतदान में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं।