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राजस्थान के धौलपुर और भरतपुर में आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे जाट समुदाय ने सरकार से बात करके अपना आंदोलन वापस ले लिया है। राज्य के जाट नेताओं और राज्य सरकार के बीच हुई बातचीत में आम सहमति बन गई है। भरतपुर के संभागीय आयुक्त कार्यालय में हुई। इस बातचीत के बाद जाट नेता विश्वेन्द्र सिंह ने आंदोलन के समाप्त होने की जानकारी दी। इससे पहले शुक्रवार शाम को हुई पहले चरण की बातचीत में कोई हल नहीं निकल पाया था। सरकार और जाट प्रतिनिधियों की इस बातचीत में जाट नेताओं की ओर से कांग्रेस नेता विश्वेंद्र सिंह और जाट संघर्ष समिति के संयोजक नेम सिंह शामिल हुए थे।

आंदोलन से यातायात व्यवस्था हुई थी प्रभावित:

राजस्थान के पूर्वी ज़िलों भरतपुर और धौलपुर में आरक्षण की मांग को लेकर हुए जाट आंदोलन के कारण ट्रेन व्यवस्था और यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई थी। हालाँकि यह आंदोलन हिंसक नहीं हुआ और इसमें किसी तरह की सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान नहीं पहुँचाया गया था। लेकिन महज़ भय के माहौल से ही इन ज़िलों में यातायात ठप हो गया था। इस दौरान दिल्ली के निजामुद्दीन से कोटा तक चलने वाली स्पेशल एक्सप्रेस ट्रैन को रद्द कर दिया गया। इससे पहले शुक्रवार को राजस्थान के भरतपुर में आरक्षण को लेकर जाटों ने जिले के सभी रेल और सड़क मार्गों पर चक्का जाम शुरू कर दिया था।

आख़िर आंदोलन की वजह क्या:

राजस्थान के धौलपुर और भरतपुर निवासी जाटों को आरक्षण नहीं मिला हुआ है। इनके अलावा राजस्थान के सभी जिलों के जाट समुदाय को आरक्षण मिला हुआ है। धौलपुर और भरतपुर में एक समय पर जाट समुदाय का राज रहा है। इसलिए यहाँ के जाट निवासियों को समृद्ध माना गया है। 1979 में अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग की स्थापना के समय धौलपुर और भरतपुर के जाट वर्ग को राजघराने से सम्बंधित होने के कारण सामान्य माना गया था। अब यहाँ के जाट समुदाय ने अपने को ओबीसी वर्ग में सम्मलित कर आरक्षण देने की मांग पर आंदोलन किया था।

सरकार की सूझ-बूझ से जल्द सुलझा मामला:

आरक्षण की मांग को लेकर होने वाला यह आंदोलन राजस्थान सरकार की समझदारी और सूझ-बूझ से आख़िर एक प्रदर्शन तक ही सीमित रह गया। प्रदेश सरकार ने हिंसक प्रदर्शन और हुड़दंगों को काबू में रखने के लिए हरसंभव प्रयास किये। सरकार ने ओबीसी आयोग की सर्वे रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्यवाही की बात की। राज्य सरकार ने जाट प्रतिनिधियों से बात कर इस मुद्दें को शांत करने की कोशिश की। सरकार की यह कोशिश सफल हुई और जाटों ने अपना आंदोलन वापस ले लिया।