जयपुर। राजस्थान में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने वाले है। कांग्रेस और बीजेपी सहित सभी राजनीतिक पार्टियों अपनी अपनी रणनीति में जुट गए है। हालांकि अभी तक दोनों ​मुख्य दलों ने मुख्यमंत्री पद के लिए उम्मीदवार को ऐलान नहीं किया है। बीते कुछ दिनों से सूबे की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के समर्थक उनको सीएम पद को चेहरा घोषित करने की मांग कर रहे है। फिलहाल पिछले दिनों उदयपुर में बीजेपी के मंच पर जो हुआ, उससे तो यही संकेत मिल रहे हैं कि बीजेपी आलाकमान वसुंधरा राजे के लिए जगह बना रहा है।

मैडम की वापसी को लेकर खासा उत्साहित है समर्थक
उदयपुर में गृहमंत्री अमित शाह ने जब से वसुंधरा का स्टेज पर भाषण करवाया है, तब से वसुंधरा राजे का खेमा मैडम की वापसी को लेकर खासा उत्साहित है। इस बीच वसुंधरा ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के क्षेत्र कोटा में रैली कर बीजेपी हाईकमान को अपनी ताकत भी दिखा दी है। वसुंधरा की इस सभा से बीजेपी के कई दिग्गज नेता, सांसद और विधायक पहुंचे थे।

हाईकमान ने बैठक में बुलाया दिल्ली
दिल्ली में बीजेपी के उत्तर क्षेत्र की मीटिंग के लिए वसुंधरा राजे को बुलावा आया तो वसुंधरा राजे ने कोटा के अपने कार्यक्रम को रद्द कर दिल्ली बुलाए जाने पर जाने का ऐलान किया। इससे पहले मैडम को राजस्थान चुनाव से पहले बड़ी जिम्मेदारी देते हुए झारखंड भेजा था। वहां पर उन्होंने विरोधी पार्टी पर हमला बोलते हुए मोदी सरकार की उपलब्धियां गिनाई थी।

वसुंधरा राजे ही होंगी बीजेपी का चेहरा
कर्नाटक नतीजों के बाद बीजेपी अपनी रणनीति बदलने को मजबूर हो गई है। कर्नाटक में बीजेपी की हार का एक प्रमुख कारण यहीं था कि उसके पास केंद्रीय नेता के तौर पर नरेंद्र मोदी चेहरा थे। बीएस येदियुरप्पा के चुनावी राजनीति से अलग होने के बाद सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार की काट के तौर पर बीजेपी के पास कोई दमदार स्थानीय चेहरा नहीं था, जिसे आगे कर वो चुनाव लड़ पाती। यही वजह है कि राजस्थान में बीजेपी को स्थानीय चेहरे को आगे करने की रणनीति पर बढ़ना होगा। वसुंधरा राजे बीजेपी के पास राजस्थान में बहुत बड़ा चेहरा है।

अजमेर में पीएम मोदी की रैली से भी मिलते हैं संकेत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 मई को अजमेर में विशाल रैली कर एक तरह से राजस्थान में पार्टी के लिए चुनाव अभियान शुरू करने का बिगुल बजाया था। इस रैली में मंच पर पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी मौजूद थीं। इस दौरान दोनों के हाव-भाव से ये संकेत मिलते हैं कि बीजेपी राजस्थान में कर्नाटक वाली ग़लती नहीं दोहराएगी और इसकी भरपूर संभावना है कि वसुंधरा राजे को ही आगे कर विधानसभा चुनाव के दंगल में उतरेगी।

पीएम मोदी ने हाथ जोड़कर स्वीकारा अभिवादन
अजमेर रैली में जिस तरह की तस्वीर दिखी, उससे एक संकेत मिला है कि अब वसुंधरा राजे ही पार्टी का चेहरा होंगी। इस रैली में पीएम मोदी ने हाथ जोड़कर वसुंधरा राजे का अभिवादन भी स्वीकार किया और दोनों नेताओं के बीच कुछ देर बातचीत भी हुई। पीएम मोदी और वसुंधरा की तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थी।

वसुंधरा राजे राजस्थान में बड़े कद की नेता
ऐसा नहीं है कि सिर्फ कर्नाटक हार ही एक मुद्दा है, जिससे बीजेपी के लिए पार्टी की अहमियत और बढ़ जाती है। दरअसल वसुंधरा राजे का कद राजस्थान में इतना बड़ा है कि बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व चाहकर भी उनकी उपेक्षा चुनाव में नहीं कर सकता है। कर्नाटक के बाद फिलहाल बड़े राज्यों में राजस्थान ही एक ऐसा सूबा है, जहां फिलहाल कांग्रेस की सरकार है और वहां कांग्रेस की स्थिति भी बेहद मजबूत है। सचिन पायलट के तमाम कोशिशों के बावजूद जिस तरह से कांग्रेस नेता और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपना कार्यकाल पूरा करने के करीब पहुंच चुके हैं, इससे पता चलता है कि गहलोत कितने मंझे हुए राजनीतिक खिलाड़ी हैं।

25 साल से राजे-गहलोत के इर्द-गिर्द राजनीति
बीते ढाई दशक से राजस्थान की सत्ता वसुंधरा राजे और अशोक गहलोत के इर्द-गिर्द ही घूमते रही है। वहां बीते कुछ चुनाव से हर पांच साल में सत्ता में बदलाव की परंपरा रही है। राजस्थान में पिछले 6 चुनाव से बीजेपी और कांग्रेस बारी-बारी से सत्ता में आती है। ये सिलसिला 1993 से जारी है। 1993 से यहां कोई भी पार्टी लगातार दो बार चुनाव नहीं जीत सकी है।

हर पांच साल में सत्ता परिवर्तन की परंपरा
परंपरा कायम रहने के हिसाब से देखें, तो सत्ता की दावेदारी बीजेपी की बन रही है। लेकिन जिस तरीके से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एक के बाद एक लोक-लुभावन वादे और घोषणाओं की ऐलान कर रहे हैं, वो साफ दिखाता है कि कांग्रेस इस बार राजस्थान में हर पांच साल पर सत्ता परिवर्तन की परंपरा बदलने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है।