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प्रदेश में स्वाइन फ्लू तेजी से जिस तरह पांव पसार रहा है, चिकित्सा विभाग देर से ही सही लेकिन हरकत में आ गया है। बिगड़ती स्थिति को देखते हुए राजस्थान सरकार ने स्वाइन फ्लू की जांच 2500 रुपए में की जाने के आदेश कुछ दिन पहले ही दिए हैं। इस जांच के पहले सात से आठ हजार रुपए खर्चने पड़ते थे लेकिन लगता है कि यह आदेश भी अब ठंडे बस्ते में चला गया है। सरकार के आदेश के बावजूद कई सरकारी अस्पताल और निजी जांच केन्द्र सरकार से लिखित में आदेश प्राप्त न होने का बहाना मार रहे हैं। ऐसे में मरीज और अन्य जनता अपने आपको ठगा हुआ सा महसूस कर रहे हैं।

इस बारे में प्रकाश डालते हुए जयपुर के गणगौरी अस्पताल के अधीक्षक डॉ.अजय माथुर ने एक हिंदी समाचार पत्र को कहा है, ‘हमारे यहां आउटसार्स से जांच होती है। सरकार ने 2500 रुपए में जांच के लिए कहा है लेकिन अभी हमारे पास ऐसा कोई आदेश नहीं आा है इसलिए जांच नहीं हो रही है। इसकी जानकारी मेडिकल कॉलेज प्रिंसीपल को भी दे दी गई है।’

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दरअसल स्वाइन फ्लू से लगातार रही मौतों पर भले ही गहलोत सरकार व्यवस्थाएं संभालने और स्थिति नियंत्रण में होने का दावा कर रही हों लेकिन हकीकत इससे दूर है। अन्य जिले तो दूर, प्रदेश की राजधानी जयपुर के सरकारी अस्पतालों में स्वाइन फ्लू की जांच नहीं हो पा रही है। गणगौरी अस्पताल में तो जांच की व्यवस्था तक नहीं है। प्राइवेट लैब में भी लिखित आदेश न होने का बहाना देकर या तो लौटाया जा रहा है या फिर पहले वाली फीस लेकर जांच हो रही है। फिलहाल इस बारे में न मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और न ही चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा को कोई बयान अभी तक सामने आया है।

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