देशभर में लोकसभा चुनाव को लेकर सभी प्रमुख दलों की ओर से चुनावी बिगुल बज चुका है। देश के दोनों प्रमुख दल भाजपा और कांग्रेस लोकसभा चुनाव के प्रचार में जुट गए हैं। राजस्थान में जहां कांग्रेस की ओर से राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी किसान धन्यवाद रैली के माध्यम से इसकी शुरुआत कर चुके हैं तो वहीं, भाजपा की ओर से खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी टोंक सवाईमाधोपुर में रैली कर चुनावी शंखनाद करेंगें। हालांकि, पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह 10 से फरवरी से राजस्थान में चुनाव प्रचार करने वाले थे लेकिन, ऐनवक्त पर कार्यक्रम में बदलाव के चलते अब पीएम ने खुद इसकी कमान संभाली है।
प्रदेश कांग्रेस में लोकसभा चुनाव के टिकट को लेकर खींचतान शुरू हो गई है। जालोर में आयोजित बैठक में कांग्रेसी कार्यकर्ताओं में हाथापाई के बाद दिल्ली में आयोजित बैठक में भी गुटबाजी की बात सामने आई है। राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी भी बैठक में मिले अलग अलग फीडबैक से नाखुश हैं। वहीं, गहलोत और पायलट खेमे में वर्चस्व की लड़ाई विधानसभा चुनाव के बाद एक बार फिर इस बैठक में देखने को मिली है।
सूत्रों की माने तो टिकट माथापच्ची के बीच एक बात कांग्रेस आलाकमान ने स्पष्ट रूप से तय कर दी है। इसमें विधानसभा चुनाव में हारे हुए विधायकों को टिकट नहीं दिया जाएगा। हालांकि, इसमें अपवाद के तौर पर मानवेन्द्र सिंह को टिकट दिया जाना तय बताया जा रहा हैं। वहीं कुछ जीते हुए विधायकों पर कांग्रेस पार्टी दांव खेलकर लोकसभा चुनाव में ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतने का मन बना चुकी है। लेकिन, पार्टी के अपने ही कार्यकर्ताओं में खेमे के रूप में बंटा होना कांग्रेस के लिए चिंता का सबब बन चुका है। राहुल गांधी इस समस्या से पार पाने के लिए अभी से जुट गए हैं। क्योंकि वो जानते हैं, लोकसभा चुनाव टिकट वितरण में सबसे ज्यादा माथापच्ची राजस्थान राज्य में हैं।

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