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आॅनलाइन ट्रांजेक्शन में यूजर्स के डेटा की चोरी और सेंधमारी की बढ़ती शिकायतों को देखते हुए अब जयपुर में देश का पहला डेटा सिक्योरिटी आॅपरेशन सेंटर तैयार किया जा रहा है। यह सेंटर अगले तीन महीने में पूरा होगा और काम शुरू कर देगा। मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे ने राजस्थान बजट 2017-18 में डेटा सिक्योरिटी आॅपरेशन सेंटर की घोषणा की थी। डेटा सिक्योरिटी आॅपरेशन सेंटर के साथ इसे देश का सबसे बड़ा डेटा सेंटर भी बताया जा रहा है। सरकार के डेटा को सुरक्षित रखने का जिम्मा संभाल रहे सूचना प्रोद्योगिकी विभाग (डीओआईटी) के प्रमुख सचिव अखिल अरोड़ा के अनुसार डेटा सेंटर गूगल और फेसबुक के डेटा सेंटर के समान आधुनिक होगा।

डेंटा सेंटर की क्षमता

मौजूदा समय में प्रदेश में सरकारी विभागों में होने वाले ट्रांजेक्शन से करीब 3.5 पेटाबाइट डेटा जनरेट हो रहा है। नए डेटा सेंटर की क्षमता 600 रेक्स की होगी जो अगले एक दशक तक प्रदेश के डेटा स्टोरेज की जरूरत पूरी कर सकेगा। डेटा सिक्योरिटी को लेकर प्रदेश में 2015 में इंफॉरमेशन सिक्योरिटी पॉलिसी जारी की जा चुकी है। इस पॉलिसी के मुताबिक डेटा सुरक्षित रखने के लिए फोर लेयर सिक्योरिटी है।

कैसे रहेगा डेटा सुरक्षित

अरोड़ा का कहना है कि डेटा लीक का सबसे ज्यादा खतरा थर्ड पार्टी एक्सेस पर होता है लेकिन प्रदेश में डेटा सिक्योरिटी पॉलिसी के मुताबिक सरकारी विभागों से इकट्ठा होने वाले डेटा का थर्ड पार्टी एक्सेस नहीं है। यह सारा डेटा डीओआईटी के डेटा सेंटर में स्टोर किया जाता है। इस डेटा सेंटर को फोर लेयर सिक्योरिटी दी गई है। इसके जरिए ट्रांजेक्शन प्वाइंट से सर्वर और इसके बाद यूजर तक पहुंचने वाली जानकारी को सुरक्षित रखा जाता है।

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फिजिकल सिक्योरिटी का बंदोबस्त भी होगा

सर्वर की सुरक्षा के लिए फिजिकल सिक्योरिटी का भी पुख्ता बंदोबस्त किया गया है। डेटा सेंटर पूरी तरह सीसीटीवी की निगरानी में होगा। सेंटर में प्रवेश करने के लिए बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन होगा जिसमें संबंधित व्यक्ति का एक्सेस लिमिट तय होगा कि वह सेंटर में कहां तक जा सकता है। इसके बाद बैंक की चेस्ट ब्रांच की तरह लोहे का बड़ा दरवाजा रहता है।

नेटवर्क सिक्योरिटी में होगा वन टाइम पासवर्ड

नेटवर्क सिक्योरिटी के लिए एक्सेस कंट्रोल है। इसमें नेटवर्क के जरिए कोई व्यक्ति आपके डेटा को एक्सेस नहीं करर सके, इसके लिए एक्सेस कंट्रोल और फायरवाल काम करते हैं। इसके अलावा चौथे चरण ममें नेटवर्क से भी डेटा एनक्रिप्शन किया जाता है। इसमें यह सुनिश्चित किया जाता है कि वही व्यक्ति डेटा एक्सिस कर सके जो इसके लिए अधिकृत है। इसके लिए संबंधित व्यक्ति को वन टाइम पासवर्ड भी दिया जाता है।

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