हम राजस्थानी मेहनत से लिखते हैं तकदीर, जो ठान लेते हैं, पूरा करते हैं ….

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गौरव यात्रा में देवस्थान राज्यमंत्री राजकुमार रिणवां के साथ मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे

खुदी को कर बुलंद इतना कि
हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे
बता तेरी रज़ा क्या है…

राजस्थानियों के लिए कुछ इसी तरह के अल्फाजों के भाव रखते हुए मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे ने कहा कि हम राजस्थानी अपने हुनर और मेहनत से अपनी तकदीर लिखना जानते हैं और जो मन में ठान लेते हैं, उसे पूरा करके ही दम लेते हैं। अगर हम सभी एकमुखी होकर और एक लक्ष्य लेकर चलेंगे तो हमें आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता। असल में मुख्यमंत्री राजे मंगलवार को चूरू एवं रतनगढ़ में राजस्थान गौरव यात्रा की आमसभाओं को सम्बोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण विद्युतीकरण योजना और सौभाग्य योजना के माध्यम से मार्च, 2019 तक प्रदेश के हर गांव-ढाणी तक बिजली पहुंचा देगी और हर घर को कम से कम एक बल्ब के माध्यम से रोशन करने का काम किया जाएगा।

किसान-पशुपालकों को दिया संबल

मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे ने हमारी सरकार ने किसानों और पशुपालकों को संबल देकर उनकी उन्नति के लिए कई काम किए हैं। प्रदेश में पहली बार 30 लाख किसानों का 9 हजार करोड़ रूपए का कर्ज माफ किया गया है। 33 प्रतिशत खराबे पर ही मुआवजे का प्रावधान किया। सहकारी बैंकों के माध्यम से 80 हजार करोड़ रुपए का ऋण इस वर्ष के अंत तक किसानों को दिया जाएगा। सहकारी बैंकों के फसली ऋण में दुर्घटना बीमा की राशि 50 हजार से बढ़ाकर 10 लाख की गई है। किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए 2013 से अब तक कृषि बिजली की दरें नहीं बढ़ाई।

पेट्रोल-डीज़ल पर वैट घटाकर समाज के सभी वर्गों को दिया लाभ

उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने वैट घटाकर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में जो कमी की है, उसका फायदा किसानों सहित समाज के सभी वर्गों को मिलेगा। हमारी सरकार ने 3100 नए पशु उप चिकित्सा केन्द्र खोले हैं। गायों के लिए अलग से गोपालन विभाग बना गोशालाओं को 850 करोड़ रुपए का अनुदान दिया है। पंजीकृत गोशालाओं में पशु आहार सहायता का समय 3 माह से बढ़ाकर 6 माह किया है। स्वयंसेवी संस्थाओं को साथ लेकर प्रत्येक जिले में एक नंदी गोशाला भी शुरू करने का प्रयास भी चल रहा है।

ताजेवाला हैड से मिलेगा चूरू-झुंझुनूं एवं सीकर को पानी

मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे ने कहा कि यमुना जल बंटवारे के लिए पांच राज्यों के बीच 1994 में एमओयू हुआ था। इसके बाद 24 साल तक यह परियोजना लम्बित पड़ी रही। वर्ष 2017 में हमारी सरकार ने ताजेवाला हेड से हमारे हिस्से का पानी लेने के लिए पाइपलाइन पर आधारित प्रस्ताव बनाकर फीजिबिलिटी रिपोर्ट केन्द्रीय जल आयोग को भेजी, जिसे केन्द्रीय जल आयोग ने फरवरी, 2018 में स्वीकृति दे दी। इस परियोजना की डीपीआर बहुत शीघ्र बनकर तैयार हो जाएगी। 20 हजार करोड़ रूपए की इस परियोजना से चूरू-झुंझुनूं एवं सीकर जिले को पानी मिलेगा।

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