जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले और उसके बाद पाकिस्तान में भारतीय वायु सेना की एयर स्ट्राइक के बाद देश का राजनीतिक माहौल काफी बदला है। इस माहौल के बीच लोकसभा चुनाव नजदीक आने की वजह से विपक्ष की रणनीति बदल रही है और कांग्रेस व भाजपा के बीच तीखी बयानबाजी का दौर भी शुरु हो चुका है। पुलवामा आतंकी हमले के बाद से भारत व पाकिस्तान के बीच भी तनाव का भयंकर माहौल व्याप्त है। एक तरफ भाजपा एयर स्ट्राइक को मोदी सरकार का ठोस व साहसिक फैसला बताकर लोकसभा चुनाव में अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटी है तो वहीं कांग्रेस, भाजपा के ऊपर ‘सेना के राजनीतिकरण’ का आरोप लगा रही है। इसी बीच राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत सीमावर्ती जिलों के दौरे पर जाकर भाजपा को चुनौती दे रहे हैं।

चार दिवसीय दौरे की शुरुआत में गहलोत ने बाड़मेर जाकर बीएसएफ,अधिकारियों व सेना से मुलाकात कर सरहदी इलाकों के बारे में जानकारी ली। एक तरफ कांग्रेस मोदी सरकार से एयर स्ट्राइक के सबूत मांग रही है। वहीं दूसरी ओर सीएम गहलोत ने बाड़मेर में कहा कि पाकिस्तान में कितने लोग मारे गए यह विवाद का विषय नहीं होना चाहिए। बल्कि आतंकवाद के खात्मे पर सभी को चर्चा करनी चाहिए। गहलोत का यह बयान अपनी पार्टी के अन्य नेताओं से अलग है।

भाजपा की राह पर चल निकले सीएम गहलोत

कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में शुमार गहलोत का यह दौरा लोकसभा चुनाव के नजरिये से भी बेहद अहम माना जा रहा है। भाजपा को मात देने के लिए कांग्रेस भी उनकी डगर पर चलकर अपना हित साधना चाह रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि गहलोत भाजपा की रणनीति पर चलते हुए प्रदेश में मिशन-25 को किसी भी तरह फतह करने की जुगत में है। गौरक्षा सम्मेलन के बाद सीमावर्ती इलाकों में जाकर जवानों का हौसला बढ़ाने की रणनीति अपनाकर सीएम गहलोत भाजपा को कड़ी चुनौती दे रहे हैं। जाहिर है कि सीएम गहलोत भाजपा की चुनावी रणनीति को भली-भांति समझ चुके हैं और उनकी राह पर चलकर ही आगामी लोकसभा चुनाव में ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतने की कोशिश में है।

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