
राजस्थान पुलिस ने आम नागरिकों को साइबर अपराधों से बचाव के लिए एक महत्वपूर्ण सलाह दी है। ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में समय की अहमियत को रेखांकित करते हुए पुलिस ने कहा है कि फ्रॉड होते ही तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें। शुरुआती एक घंटे को ‘गोल्डन आवर’ कहा जाता है, जो पीड़ित की मेहनत की कमाई वापस दिलाने में निर्णायक भूमिका निभाता है।
तेजी से बढ़ रहे साइबर ठगी के मामले
आज के डिजिटल युग में ऑनलाइन बैंकिंग, यूपीआई, नेट बैंकिंग और डिजिटल भुगतान के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर ठगी के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। ठग विभिन्न तरीकों से लोगों को फंसाकर उनके खातों से पैसे निकाल लेते हैं। लेकिन अगर पीड़ित तुरंत कार्रवाई करे तो नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है। राजस्थान पुलिस के अनुसार, गोल्डन आवर में की गई शिकायत से साइबर सेल और बैंक मिलकर त्वरित कार्रवाई करते हैं।
गोल्डन आवर इसलिए है महत्वपूर्ण
साइबर फ्रॉड होते ही पहले एक घंटे में शिकायत दर्ज कराना बेहद जरूरी है। इस दौरान ठगों के खाते में पैसा ट्रांसफर होने के बावजूद निकासी को रोका जा सकता है। देरी होने पर पैसा कई खातों में ट्रांसफर हो जाता है और वापस पाना मुश्किल हो जाता है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि गोल्डन आवर में की गई शिकायत से पीड़ित को अपनी रकम वापस मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
1930 पर शिकायत दर्ज होने के बाद क्या होता है?
हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करते ही शिकायत पोर्टल पर दर्ज हो जाती है। सिस्टम तुरंत पीड़ित और संदिग्ध खातों के बैंकों को अलर्ट भेजता है। संबंधित बैंक ठगों के खाते को फ्रीज कर देते हैं, जिससे पैसे की आगे निकासी रुक जाती है। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद रुकी हुई राशि पीड़ित को वापस कर दी जाती है। यह पूरा तंत्र साइबर सेल और बैंकों के समन्वय से काम करता है, जिससे त्वरित राहत मिलती है।
ऐसे संपर्क करें और शिकायत दर्ज कराएं
साइबर फ्रॉड का शिकार होने पर बिना किसी देरी के राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। इसके अलावा व्हाट्सएप नंबर 9256001930 और 9257510100 पर भी संपर्क किया जा सकता है। ऑनलाइन शिकायत के लिए आधिकारिक पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। राजस्थान पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध लिंक, कॉल या मैसेज पर तुरंत प्रतिक्रिया न दें और व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें।
डिजिटल सुरक्षा के लिए जागरूकता जरूरी
राजस्थान पुलिस का संदेश साफ है—‘आमजन में विश्वास, अपराधियों में डर’। साइबर अपराधों से बचाव के लिए जागरूकता सबसे बड़ा हथियार है। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे नियमित रूप से पासवर्ड बदलें, दो-फैक्टर ऑथेंटिकेशन सक्रिय रखें और अजनबी स्रोतों से आने वाले ऑफर या लिंक्स पर क्लिक न करें। फ्रॉड की स्थिति में घबराएं नहीं, बल्कि तुरंत 1930 पर संपर्क करें।
आपात स्थिति में 100 या 112 नंबर डायल करें
राजस्थान पुलिस लगातार साइबर अपराधों के खिलाफ अभियान चला रही है और नागरिकों को डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक कर रही है। इस तरह की जानकारी समय-समय पर साझा करके पुलिस यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है कि लोग अपनी मेहनत की कमाई को ठगों के हाथों से बचा सकें। याद रखें, साइबर फ्रॉड होते ही गोल्डन आवर का सही इस्तेमाल आपकी आर्थिक सुरक्षा का सबसे मजबूत हथियार साबित हो सकता है। तुरंत कार्रवाई से न सिर्फ अपना पैसा बचाया जा सकता है, बल्कि अन्य संभावित पीड़ितों को भी बचाया जा सकता है। किसी भी आपात स्थिति में 100 या 112 नंबर पर भी मदद ली जा सकती है। सुरक्षित डिजिटल भविष्य के लिए सतर्कता ही सबसे बड़ी कुंजी




