
जयपुर: ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि पर मकान, दुकान, उद्योग या अन्य गैर-कृषि काम करने के लिए अब सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। राज्य सरकार ने जमीन के रूपांतरण की प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी है। नए नियमों के तहत आवेदन के दिन ही अनुमति आदेश जारी हो जाएगा।
राजस्थान भू-राजस्व (ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि का गैर-कृषि प्रयोजनों के लिए उपयोग) नियम-2026 दो नवंबर से लागू होंगे। इसके साथ पुराने नियम समाप्त हो जाएंगे। नए नियमों में कृषि भूमि को आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक, संस्थागत, पर्यटन, चिकित्सा, खेल परिसर, खाद्य प्रसंस्करण और नवीकरणीय ऊर्जा सहित 14 तरह के कामों के लिए उपयोग करने की अनुमति मिलेगी। रूपांतरण के लिए प्रीमियम की गणना ऑनलाइन होगी और आवेदन के साथ ही राशि जमा करनी होगी। आवासीय उपयोग के लिए 2,000 रुपए और अन्य प्रयोजनों के लिए 20,000 रुपए आवेदन शुल्क देना होगा। यह शुल्क वापस नहीं मिलेगा।
अपने आप बदलेगा राजस्व रिकॉर्ड
आवेदन के दिन अनुमति आदेश जारी होने के बाद उपखंड अधिकारी दस्तावेजों की जांच करेगा। इसके लिए एक महीने का समय तय किया गया है। दस्तावेज सही पाए जाने पर या तय अवधि में कोई निर्णय नहीं होने पर आवेदन के 30वें दिन ऑनलाइन पोर्टल पर नामांतरण और जमीन की श्रेणी में बदलाव अपने आप हो जाएगा। इस अवधि में जमीन किसी तीसरे व्यक्ति को हस्तांतरित नहीं की जा सकेगी।
किस काम के लिए कितना प्रीमियम?
स्वतंत्र उपयोग: डीएलसी दर का 5 प्रतिशत।
व्यावसायिक व अन्य संबंधित उपयोग: 10 प्रतिशत।
नवीकरणीय ऊर्जा परियोजना: 0.5 प्रतिशत।
खाद्य प्रसंस्करण इकाई: 2.5 प्रतिशत।
खातेदार को अधिकतम 500 वर्गमीटर जमीन पर अपना मकान या पशुशाला बनाने के लिए प्रीमियम नहीं देना होगा। कुछ पात्र परियोजनाओं और औद्योगिक इकाइयों को भी नियमानुसार छूट मिलेगी।
गलत जानकारी पर दोगुना, बिना अनुमति उपयोग पर चार गुना जुर्माना
गलत जानकारी या फर्जी दस्तावेजों से अनुमति लेने पर आदेश निरस्त किया जा सकेगा और प्रीमियम का दोगुना जुर्माना लगेगा। बिना अनुमति कृषि भूमि का गैर-कृषि उपयोग करने पर निर्धारित प्रीमियम का चार गुना जुर्माना देना होगा। इसकी निगरानी के लिए पटवारी साल में कम से कम दो बार सर्वे कर रिपोर्ट देगा। अनुमति आदेश से असंतुष्ट व्यक्ति 30 दिन के भीतर जिला कलक्टर के समक्ष अपील कर सकेगा।
रूपांतरण के बाद भी निर्माण की मंजूरी जरूरी
जमीन का रूपांतरण होने का मतलब यह नहीं है कि उस पर सीधे निर्माण शुरू किया जा सकता है। इसके लिए ले-आउट और भवन निर्माण की अलग मंजूरी लेनी होगी। परियोजना तक कम से कम 30 फुट चौड़ा रास्ता होना जरूरी है। निर्धारित भूखंडों में वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था करनी होगी। 500 वर्गमीटर या इससे अधिक क्षेत्रफल वाले मामलों में भवन मानचित्र की स्वीकृति भी अनिवार्य होगी। नदी-नालों, तालाबों, जलस्रोतों, सार्वजनिक रास्तों, श्मशान, कब्रिस्तान, अवाप्त की जा रही जमीन और पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्रों में रूपांतरण की अनुमति नहीं मिलेगी।
अध्ययन के बाद नियम
राज्य सरकार ने अप्रैल में इस संबंध में कमेटी गठित की थी। अन्य राज्यों के नियमों का अध्ययन करने के बाद नए नियम तैयार किए गए हैं।




