किसान हितैषी होने का दावा करने वाली कांग्रेस सरकार अन्नदाता की मांगों पर ध्यान नहीं दे रही है। राजस्थान के सीकर जिले में पिछले 7 दिनों से प्याज की सरकारी खरीद की मांग को लेकर हजारों किसान कलेक्ट्रेट के बाहर महापड़ाव डाले हुए हैं, लेकिन कोई भी सरकारी नुमाइंदा उनकी मदद को तैयार नहीं दिख रहा है। बड़ी संख्या में किसान प्याज की सरकारी खरीद की मांग के संबंध में प्रशासन को कई दफा अवगत करा चुके हैं लेकिन सरकार के कानों में जू तक नहीं रेंग रही है। मंगलवार को सीकर के हजारों किसानों को मजबूरन अपनी मांगों को पूरा करवाने के लिए सड़कों पर उतरना पड़ा। इस दौरान किसानों ने पहले शिक्षा मंत्री और उसके बाद सभी विधायकों के आवास का घेराव किया। साथ ही किसानों ने सीकर शहर के मुख्य मार्गों से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की प्रतीकात्मक शव यात्रा निकालकर भी अपना विरोध जताया।

किसानों के हुंकार मार्च के दौरान बड़ी संख्या में महिलाओं तथा विधायक व माकपा नेताओं ने हिस्सा लेकर गहलोत सरकार के खिलाफ जमकर विरोध-प्रदर्शन किया। किसानों का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगें नहीं मान लेती, वे सड़क से नहीं हटेंगे।

गौरतलब है कि प्याज की बंपर पैदावार होने से किसानों को उचित भाव नहीं मिल पा रहा है। किसानों को उनकी लागत भी नहीं मिलने से वे सरकार से समर्थन मूल्य पर खरीद की मांग कर रहे हैं। फिलहाल किसान महज 2-3 रु प्रति किलो की दर से प्याज बेचने को मजबूर है। वहीं उनकी मांग है कि सरकार बाजार हस्तक्षेप नीति के तहत कम से कम 8 रु प्रति किलो के हिसाब से प्याज खरीदें।

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