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राजस्थान कांग्रेस

महीनेभर मीटिंग के बाद भी  ‘लिस्ट इन वेटिंग’ दिग्गजों के टिकटों पर एकमत नहीं होने से अटके प्रत्याशियों के नाम, गहलोत-पायलट लड़ेंगे चुनाव

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राजस्थान में चुनावी महाभारत का शंखनाद हो चुका है। राजस्थान विधानसभा चुनाव नामांकन की रणभेदी भी चढ़ चुकी है और मतदान की तिथि की घोषणा भी हो गई है लेकिन कांग्रेसी योद्धाओं के नामों की सूची अभी भी दिल्ली के गर्भग्रह में दबी है। कांग्रेस स्क्रीनिंग कमेटी की चैयरमैन कुमारी शैलजा पिछले एक महीने से प्रतिदिन टिकटों को लेकर आला अधिकारियों के साथ बैठकें ले रही है लेकिन फिर वही ढांक के तीन पात। नामांकन को शुरु हुए 3 दिन हो चुके हैं लेकिन लिस्ट अभी तक वेटिंग में बनी हुई है। दूसरी ओर, भाजपा 131 प्रत्याशियों की लिस्ट जारी कर चुकी है और शेष नाम भी जल्दी ही घोषित कर दिए जाएंगे। गौर करने वाली बात तो यह भी है कि लिस्ट आउट करने में कांग्रेस के नेताओं की आपसी कलह अब उभर कर सामने आने लगी है। पार्टी प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बाद अब प्रतिपक्ष नेता रामेश्वर डूडी के बाघी स्वर भी तेज हो गए हैं। तीनों के बीच सहमति न बनने की वजह से लिस्ट भी आउट नहीं हो पा रही है।

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इसी बीच गहलोत व सचिन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राजस्थान विधानसभा चुनाव लड़ने की बात स्वीकारी है। हालांकि सचिन पायलट की चुनावी सीट की फिलहाल कोई जानकारी नहीं है। राजस्थान में चुनाव 7 नवम्बर और परिणाम 11 नवम्बर को है।

प्रत्याशियों के नाम घोषित न कर पाने की 3 प्रमुख वजह

1. कुछ सीटों पर विवाद कायम
राजस्थान विधानसभा की बीकानेर पूर्व, फलौदी, लोहावट, फुलेरा, सांगरिया, हवामहल, मालवीय नगर, खाजूवाला, बांदीकुई, लूणकरणसर, सवाई माधोपुर, टोडाभीम और निवाई सहित कई सीटों पर अभी भी टिकट विवाद चल रहा है।

2. अन्य के लिए टिकट की मांग
सुनने में आ रहा है कि नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी फुलेरा व मालवीय नगर से महिला प्रत्याशी चाहते हैं। मालवीय नगर सीटर से कांग्रेस की मीडिया चेयरपर्सन अर्चना शर्मा चुनाव लड़ चुकी हैं और इस बार भी तैयारी में है। डूडी किसी ओर की पैरवी कर रहे हैं। फुलेरा से भी अपनी पसंद की प्रत्याशी की डिमांड हो रही है।

3. दो बार हारे चेहरों पर विवाद
आलाकमान चाहता है कि युवाओं को ज्यादा मौका दिया जाएगा जबकि एक वर्ग पुराने कांग्रेसियों को टिकट देने के पक्ष में है। इन कांग्रेसियों में कुछ तो ऐसे हैं जो पिछले दो चुनाव लगातार हार रहे हैं और उम्रदराज भी हो चले हैं। ऐसी 30 सीटों पर सहमति नहीं बनी।

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