जयपुर। आजादी के बाद से मरू प्रदेश राजस्थान में राजनीतिक अस्थिरता का माहौल रहा है। जिसका ताजा उदाहरण पिछले 30 सालों से आ रहे विधानसभा चुनाव परिणामों के रूप में भी सबने देखा है। राजस्थान का मतदाता सियासी पारे को तवे पर रखी रोटी की तरह देखता आया है, जिसे समय-समय पर पलट देना ही उचित है। यही कारण है कि यहां हर पांच साल में सरकार बदलकर जनता हुक्मरानों को अपनी सियासी ताकत का आईना दिखा देती है। लेकिन राजस्थान में लोकसभा की एक सीट ऐसी है जहां के लोगों ने पिछले 30 वर्षों से ना तो नेता बदला है और ना ही नियती। आइए, जानते हैं देश के राजनीतिक इतिहास में महत्त्वपूर्ण भूमिका रखने वाली झालावाड़-बारां लोकसभा सीट के कुछ सियासी समीकरण…

कांग्रेस ने उम्मीदवार भी बदले, लेकिन हर बार मिली हार

झालावाड़-बारां सीट पर भाजपा की अजेय लोकप्रियता का मुख्य कारण राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को माना जाता है। राजे यहां से पांच बार लोकसभा तथा झालरापाटन से चार बार विधानसभा का चुनाव जीत चुकी है। वहीं राजे के बाद लोकसभा की कमान उनके बेटे दुष्यंत सिंह ने संभाल रखी है। राजनीतिक पंडितों की मानें तो कांग्रेस वर्ष 1989 से इस सीट पर जीत हासिल करने की कोशिश में लगी हुई है लेकिन वसुंधरा राजे की लोकप्रियता के आगे कांग्रेस के बड़े-बड़े से उम्मीदवार भी यहां पानी भरते ही नजर आते हैं। दक्षिण राजस्थान की इस हॉट सीट का सियासी लेखा-जोखा देखे तो कांग्रेस यहां से लगातार अपने उम्मीदवार भी बदलती आई है। 1999 में अबरार अहमद, 2004 में संजय गुर्जर, 2009 में उर्मिला जैन तथा 2014 में प्रमोद भाया ने यहां से कांग्रेस के बैनर तले भाजपा को चुनौती देने का प्रयास किया। लेकिन हर बार कांग्रेस को यहां से हार का ही सामना करना पड़ा है।

चारों सीटों पर भाजपा का परचम

झालावाड़ बारां लोकसभा क्षेत्र की वर्तमान राजनीतिक परस्थिति देखें तो इस लोकसभा में कुल 8 विधाानसभा सीटें हैं। जिनमें से झालावाड़ जिले की चारों सीटों पर भारतीय जनता पार्टी का कब्जा है, वहीं बारां की चार सीटों में से तीन पर कांग्रेस तथा एक पर भाजपा का परचम है। 2018 के विधानसभा चुनाव में भले ही कांग्रेस ने प्रदेशभर में अच्छा प्रदर्शन कर सरकार बनाने में कामयाबी हासिल कर ली हो, लेकिन झालावाड़ जिले में कांग्रेस का खाता भी नहीं खुल पाया था। यही कारण है कि झालावाड़ जिले को भाजपा की कद्दावर नेता वसुंधरा राजे का गढ़ कहा जाता है।

दुष्यंत सिंह को हराना कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती

आगामी लोकसभा चुनावों की बात करें तो इस बार भी झालावाड़-बारां सीट पर भाजपा की विजय ही सुनिश्चित बताई जा रही है। पूर्व राज्य मंत्री श्रीकृष्ण पाटीदार की मानें तो आगामी लोकतंत्र के महापर्व में जीत हासिल करने के लिए भारतीय जनता पार्टी पूरी तरह तैयार है। पाटीदार ने कहा कि हमारी तैयारियों का अंदाजा आप इस बात से भी लगा सकते हैं कि भाजपा ने झालावाड़ की चारों विधानसभा सीटों पर इस बार भी जीत हासिल की है तथा दुष्यंत सिंह का नाम बच्चे-बच्चे की जुबां पर है। जिससे यह साफ हो जाता है कि आगामी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का यहां से एक बार फिर सुपड़ा साफ होने वाला है।

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