जयपुर। – जयपुर पुलिस कमिश्नरेट में तैनात सिपाही जितेन्द्र नरूका इन दिनों अपनी अनोखी प्रतिभा को लेकर सुर्खियों में हैं। ड्यूटी के दौरान सख़्त और अनुशासित दिखने वाले नरूका को लेखन व गायन में महारथ हासिल है अपने स्वयं के लिखे हुएं छंदों को ये मधुर स्वर में गाते हैं की सुनने वाला मंत्रमुग्ध हो जाता है सिपाही जितेन्द्र सिंह ने भगवान श्री कृष्ण व उनकी लीलाओं पर सैकड़ों छंदों की रचना की है

वर्तमान में सिपाही जितेन्द्र सिंह जयपुर पुलिस कमिश्नरेट के डीएसटी ईस्ट में तैनात हैं। अपने व्यस्त समय में से भी निकालकर वे अपनी रचनात्मकता को छंदों और कविताओं के माध्यम से अभिव्यक्त करते हैं। पुलिस की स्पेशल टीम पर आपराधिक घटनाओं का पर्दाफाश करने की जिम्मेदारी ज्यादा होती है इसके बाबजूद जितेन्द्र सिंह नरूका लेखन के लिए समय निकाल ही लेते हैं। कविता और छंदों की दुनिया में खो जाते हैं। उनके शब्दों में संवेदनाओं का ऐसा प्रवाह होता है कि श्रोता बरबस ही वाहवाही करने लगते हैं।

नरूका के छंदों में समाज की हकीकत, मानवीय रिश्तों की नजाकत और देशभक्ति की गूंज साफ़ सुनाई देती है। उनका मानना है कि कविता सिर्फ़ अभिव्यक्ति नहीं बल्कि समाज को आईना दिखाने का माध्यम है।

 

नरूका के ‌पुलिस की सेवा को लेकर लोकप्रिय छंद:,

 

“अपनी सेवाओं से सबके दिलों को जीत लाता हूँ

करके दिन रात की ड्युटी अमन की रीत लाता हूँ

पुलिस से रोजी ऱोटी है पुलिस से जिंदगी अपनी

पुलिस का आदमी हूं और पुलिस के गीत गाता हूं”

 

“दूध और घी से बढकर दूसरी मेवा नहीं होती

जो जीवन दान देती है जानलेवा नहीं होती

जमाना लाख करले चाकरी किसी भी महकमें की

पुलिस और फौज वे बढकर कोई सेवा नहीं होती है ”

 

कभी आम जनता की नज़रों से छिपी यह प्रतिभा अब मंचों पर चमक रही है और साहित्यिक जगत में जयपुर पुलिस का नाम भी रोशन कर रही है।