आपने ये बात तो सुनी ही होगी कि “गुजर गया वो जब मकान भले ही कच्चे होते थे, मगर लोग सच्चे हुआ करते थे।“ अब मकान तो पक्के हो गए हैं, मगर लोग अपने ही शब्दों के कच्चे हो गए हैं। पहले एक वक़्त था जब कहा जाता था “रघुकुल रीत सदाचली आयी, प्राण जाये पर वचन न जाये।” अर्थात कोई भी व्यक्ति एक बार कोई वचन या वादा कर देता था तो उसे पूरा करना ही पड़ता था। चाहे उसे पूरा  करने में उसके प्राण क्यों ना निकल जाये। लेकिन आजकल ऐसे लोग बहुत कम हैं जो अपने किये गए वादों को पूरा करने के लिए अपनी जी-जान लगा देते हैं, और वचन पूरा करते हैं। वरना आजकल तो लोग अपना उल्लू  सीधा करने के लिए रोज़ नए वादे करते हैं रोज़ तोड़ देते हैं। जिसका जीता-जगता उदाहरण राजस्थान की नयी सरकार, कांग्रेस सरकार है। कांग्रेस ने दस दिन में किसानों का क़र्ज़ माफ़ करने का वादा किया था। मगर…

जब जिम्मेदारी संभल नहीं रही तो फिर लेने की क्या ज़रूरत थी :

अब जब कांग्रेस ने वादे कर ही दिए तो निभाने भी तो पडेंगे। फिर चाहे उनको खडे-खडे काम करना पड़े या बैठकर लेकिन मेहनत तो करनी ही पड़ेगी। संसाधनों या पूर्व सरकार की कमी बताकर कांग्रेस अपनी ज़िम्मेदारियों के कन्नी नहीं काट सकती। जब जिम्मेदारी संभल नहीं रही तो फिर लेने की क्या ज़रूरत थी? और जब ले ली तो फिर भुगतो और काम करो। आराम ही करना है, तो अब भी सरकार से इस्तीफ़ा दे दो। एक महीना गुजर गया, कांग्रेस सरकार द्वारा किये गए चुनावी वादों में से अभी तक एक भी वादा पूरा होने की उम्मीद नहीं दिख रही। मंत्रिमंडल का गठन होने के बाद से अब तक तीन बार विधानसभा का सत्र बुलाया गया और जिनमे से दो बार विधायकों के हंगामे के बाद विधानसभा की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा। कांग्रेस के नेता और मंत्री भी तो यही चाहते हैं कि काम कम से कम हो, और मज़े ज़्यादा से ज़्यादा। हद तो तब हो गयी जब विधानसभा में राज्यपाल कल्याण सिंह के अभिभाषण में दौरान भी नए विधायक लगातार हंगामा करते रहे। इन विधायकों में हनुमान बेनीवाल और बलवान पूनिया भी शामिल थे। जिन्होंने मूंग के भाव को लेकर पूर्व भाजपा सरकार पर आरोप ख़रीद नहीं करने के आरोप लगाए। लेकिन कांग्रेस सरकार ने अभी तक किसानों से मूंग और मूंगफली की ख़रीद के लिए कोई व्यवस्था की है और ना ही कोई न्यूनतम समर्थन मूल्य निश्चित किया है।

राज्यपाल कल्याण सिंह के अभिभाषण के बीच विधायकों ने की अभद्रता Ashok Gehlot Government of Rajasthan BJP Rajasthan

News18 Rajasthan यांनी वर पोस्ट केले बुधवार, १६ जानेवारी, २०१९

 

जब कांग्रेस अभ्यर्थियों की मांग पूरी नहीं कर पा रही तो मूंग कहाँ से ख़रीदेगी :

जनता, किसान, युवाओं, महिलाओं, विद्यार्थियों और बेरोजगारों की भलाई का वादा कर सत्ता पान करने वाली कांग्रेस सरकार को बने हुए 31 दिन हो गए लेकिन अभी तक जनता के किसी भी वर्ग को कांग्रेस संतुष्ट करती नज़र नहीं आयी। पहले किसानों ने यूरिया के लिए प्रर्दशन किया, फिर महिलाओं के ख़िलाफ़ अत्याचार बढे, फिर प्रदेश में स्वाइन फ़्लू फैला जिसकी चपेट में आकर अब तक 971 लोग बीमार पड़ चुके हैं, और 39 लोगों की मौत हो चुकी है। फिर प्रदेश के युवाओं ने व्याख्याता भर्ती परीक्षा को लेकर सरकार के ख़िलाफ़ प्रर्दशन और अब हज़ारों RAS अभ्यर्थी एक सप्ताह से धरना प्रदर्शन पर बैठे हैं, लेकिन ना तो सरकार उनकी कोई सुध ले रही है और ना ही प्रशासन। जिस जगह पर बैठकर अभ्यर्थी धरना दे रहे थे, उस जगह पर भी पुलिस प्रशासन द्वारा ताला लगा दिया गया और प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थी ठण्ड में सड़क पर बैठने और रात गुज़ारने को मज़बूर हो गए हैं। इसके आलावा कांग्रेस की सरकार बनते ही प्रदेश में महिला दुष्कर्म और बालात्कार की घटानाओं की तो जैसे बाढ़ सी आ गयी है। प्रदेश में हर रोज कहीं ना कहीं से बालात्कार और दुष्कर्म की घटानाओं की ख़बर आ रही हैं। लेकिन इन सब से इतर कांग्रेस सरकार के आक़ाओं के कानो पर जूं तक नहीं रेंग रही है।

 

कानों में जूं कैसे रेंगेगी जब दिमाग़ में लोकसभा चुनावों का कीड़ा कुलबुला रहा हो :

फिलहाल तो कांग्रेस सरकार को राजस्थान की जनता से ज़्यादा फ़िकर तो गांधी परिवार और लोकसभा चुनावों की हो रही हैं। इसीलिए तो प्रदेश के सारे काम-धाम छोड़कर पहले लोकसभा चुनावों की तैयारी करने के लिए बैठकों को में लगी है। फिर चाहे प्रदेश में चोरी हो, डकैती हो, बकैती हो, बलात्कार हो, चमत्कार हो या फिर संसाधनों के आभाव में तरसता और तड़पता किसान, बेरोज़गार, विद्यार्थी और आम आदमी। इन्हें किसी की कोई परवाह नहीं है। ये तो बस लोकसभा चुनावों में राजस्थान से ज़्यादा से ज़्यादा सीटें जीतकर दिल्ली में स्थित देश की राजगद्दी पर गांधी परिवार के लाड़ले को बिठाने की चिंता में दिनोंदिन बूढ़े होते जा रहे हैं।

विकास के इंतज़ार में देश को बूढ़ा बना दिया कांग्रेस ने :

134 साल पुरानी और छः दशकों से ज़्यादा हिंदुस्तान की सत्ता पर काबिज़ रहने के बावज़ूद कांग्रेस हमारे देश को उस मुक़ाम तक नहीं पहुंचा पायी जहां आज दुनिया के अन्य देश हैं। आज़ाद हिदुस्तान के पास भी तो उतने ही संसाधन थे जितने अन्य देशों के पास, मगर फिर भी देश अभी तक विकासशील देशों की सूचि में ही शामिल है, विकसित नहीं हुआ है। इसका एक ही कारण हो सकता हैं। कांग्रेस सरकारों ने देश को विकसित बनाने के प्रयास ही नहीं किये। कांग्रेस पार्टी ने हमेशा से देश को इतना सा ही दिया जिसमे देश गुजारा तो कर सकता था विकास नहीं। बाकी का सारा बचा-कुचा माल कांग्रेसी ख़ुद चट कर गए और डकार भी नहीं ली। अगर हम मोटा-मोटा भी हिसाब लगाएं तो साल 2004 से लेकर 2014 तक कांग्रेस के मात्र 10 साल के कार्यकाल में ही “पांच लाख़ पचपन हज़ार छः सौ इक्क्यानवे करोड़ (INR 555651/-) रुपये के घोटाले हुए।” इसके आलावा छुट-पुट घोटाले अलग हैं। आप और हम तो अंदाज़ा भी नहीं नहीं लगा सकते की कांग्रेस ने साल 2004 से पहले पचास साल में कितने घोटाले किये होंगे और कितने रुपयों का गबन किया होगा।

कांग्रेस ने पहले जो किया सो तो किया लेकिन आज भी सरकार बने ठीक एक महीना पूरा हो गया मगर ना तो किसानों का क़र्ज़ माफ़ हुआ ना कोई और वादा कांग्रेस ने अभी तक पूरा किया है। ना ही प्रदेश की जनता को कुछ आशा की किरण दिखाई दे रही है। ऐसे में जनता के मन में शायद एक ही बात रह-रह कर  उठ रही होगी कि कांग्रेस पार्टी ने हमारे साथ धोखा किया है या हम ख़ुद धोख़े का शिकार हो गए हैं। क्या वाकई में कांग्रेस, सरकार चलाने आयी है या जनता की छाती पर बैठकर मूंग दलने आयी है?

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Author : Mahendra

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