राहुल गांधी एक बुज़ुर्ग युवा

हिंदुस्तान के मेरे सभी साथियों! सभी का मतलब सभी। बच्चे बूढ़े जवान। मैं भाईयों और बहनों नहीं कहूंगा। क्योंकि भाई-बहन कहने का ज़माना अब गया। वैसे भी बोलने से ज़्यादा इंसान का आचरण ही उसकी प्रवृत्ति बता देता है। ख़ैर सभी को राष्ट्रीय युवा दिवस की ढेरों शुभकामनाएं। राष्ट्रीय युवा दिवस को युवा दिवस इसीलिए कहा जाता है क्योंकि इस दिन एक ऐसे शख़्श का जन्म हुआ था। जिसने युवावस्था ग्रहण करते ही सम्पूर्ण विश्व में अपना ही नहीं पूरे भारतवर्ष का नाम प्रसिद्धि की बुलंदियों तक पहुंचाया। युवा रहते ही उन्होंने देश के लिए कई ऐसे काम किये जो 140 वर्षों से हिंदुस्तान के प्रत्येक युवा के लिए प्रेरणा के स्रोत बने हुए हैं, युवावस्था में ही वो शख़्शियत मात्र 39 वर्ष की आयु में इस दुनिया को अलविदा कह गयी थी। जी हाँ आज उसी शख़्शियत “स्वामी विवेकानंद” का जन्म दिन है।

स्वामी विवेकानंद जन्म व राष्ट्रीय युवा दिवस

राजनीति ने युवावस्था के मायने ही बदल दिए हैं :

स्वामी विवेकानंद के बारे में आपने पहले से ही पढ़-सुन रखा होगा। वे बड़े स्‍वप्न‍दृष्‍टा थे। जिन्होंने एक ऐसे समाज की कल्‍पना की, जिसमें धर्म-जाति के आधार पर मनुष्‍य-मनुष्‍य में कोई भेद न रहे। उन्‍होंने वेदान्त के सिद्धान्तों को इसी रूप में रखा। सांसारिक ज़रूरतों और मानसिक ज़रूरतों की बहस में पड़े बिना ही समानता के जो सिद्धांत स्वामी विवेकानंद ने दिए उससे मज़बूत बौद्धिक सिद्धांत  शायद ही कोई दूसरा ढूंढा जा सका है। विवेकानन्‍द को हिंदुस्तानी युवकों से बड़ी आशाएँ थीं। आज के युवकों के लिये इस ओजस्‍वी संन्‍यासी का जीवन एक आदर्श है। मगर आज ऐसा समय आ गया है कि राजनीति के स्वार्थ में युवावस्था के मायने ही बदल गए हैं। आज 40 साल से ऊपर आयु वर्ग के लोगों को युवा कहा जा रहा है। जिसका ताजा उदाहरण हिंदुस्तान की राजनीति में स्पष्ट रूप से देख सकते है। हिंदुस्तान की सबसे बुज़ुर्ग पार्टी कांग्रेस में कई बुज़ुर्ग युवा नेता हैं। जिन्हें यूथ कहकर पुकारा जा रहा है। श्री सचिन पायलट 41 वर्षीय युवा, श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया 48 वर्षीय युवा, और सबसे युवा तो कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रिय अध्यक्ष हैं। माननीय श्री राहुल गांधी जी 48 वर्षीय युवा। अपने हर भाषण में युवाओं को साथ लेकर चलने की बात कहने वाले युवा राहुल गांधी जी ने अभी हाल ही में तीन राज्यों में सरकार बनायीं। राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ में और तीनो ही राज्यों में कांग्रेस ने अपने प्रत्यासियों में बुज़ुर्ग युवाओं को शामिल किया है, जिनकी औसत आयु भी 40 साल से ऊपर निकल कर आती है।

राहुल गांधी एक बुज़ुर्ग युवा

लेकिन युवा राहुल गांधी के साथ तो युवा हैं ही नहीं :

अक्सर अपनी जन सभाओं में यूथ को साथ लेकर चलने की बात करने वाले राहुल गांधी के साथ देश का युवा चलने को तैयार ही नहीं हैं। उसका भी ताजा उदाहरण है, उत्तर प्रदेश में एक साथ मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ने वाले यूपी के सबसे युवा, कार्यकाल संभालने वाले पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव। साल 2017 में हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों  में दोनों बुज़ुर्ग युवाओं राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने मिलकर भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़ा। मगर ये बुज़ुर्ग युवा गठबंधन हार गया। आज वही बुज़ुर्ग युवा अखिलेश यादव ने कांग्रेस के साथ गठबंधन करने से मना कर दिया और बसपा के साथ सांठ-गांठ कर ली। क्योंकि शायद कांग्रेस, सपा और बसपा की नज़र में युवावस्था की उम्र दिन पर दिन बढ़ती जा रही है। तभी तो साल दर साल बीतने के बाद भी इन बुज़ुर्ग युवाओं को बुज़ुर्ग ना बुलाकर युवा बुलाया जा रहा है। ऐसे में इन युवाओं में टकराव होना भी स्वाभाविक है। तभी तो सपा-बसपा ने यूपी की सभी 80 लोकसभा सीटों में से 38-38 सीटों पर मिलाकर चुनाव लड़ने की औपचारिक घोषणा आज कर दी है। बाकी बची 4 सीटों में से 2 अन्य पार्टयों और सीट रायबरेली और अमेठी, कांग्रेस के लिए छोड़ दी हैं। मगर राहुल गांधी को इस बात की चिंता नहीं है, और ना देश में रह रहे सवा सौ करोड़ हिन्दुस्तानियों की चिंता है। राहुल को हिंदुस्तान में रह रही जनता से ज़्यादा विदेशों में रह रही हिंदुस्तानी जनता की झूठी फ़िक्र हो रही है। जिसे जताने के लिए राहुल गांधी ने दुबई में जाकर शो किया है।

बसपा और सपा ने कांग्रेस के साथ गठबंधन करने से इंकार कर दिया

देश की फ़िक्र विदेश में जाकर दिखाई जा रही है :

राहुल गांधी बीते दिन संयुक्त अऱब अमीरात के शहर दुबई में आयोजित एक सभा को सम्बोधित करने गए थे। जिसमें यूएई में रहने वाले सभी अप्रवासी भारतीयों को एकत्रित किया गया। राहुल गांधी ने वहां असहिष्णुता पर भाषण दिया और कहा आप एक महान विचार का हिस्सा हैं जिसमें सहिष्णुता, भाईचारा शामिल है। पूरी दुनिया को दिखाने के लिए आपके पास काफी कुछ है। उन्होंने महात्मा गांधी के अहिंसा वाले विचार को भी लोगों के समक्ष रहा। हालांकि ये बात अलग है कि जिस वक़्त राहुल गांधी दुबई में भाषण दे रहे थे उसी वक़्त हिंदुस्तान में कुछ कांग्रेसी कार्यकर्ता 11 तारीख़ को ही रिलीज़ हुई बॉलीवुड फ़िल्म “द एक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टर” के विरोध में कोलकाता में तोड़ फोड़ कर रहे थे।

 

इस दौरान राहु गांधी ने कहा की देश का भविष्य आप से जुड़ा हुआ है।

अगर कांग्रेस भारतीयों की फ़िक्र करती तो वे अप्रवासी नहीं होते :

हिंदुस्तान के आज़ाद होने से पहले तो कांग्रेस यहां की राजनीति चलाती ही थी, लेकिन आज़ादी के बाद भी 1947 से लेकर 2019 तक के दौरान हिंदुस्तान पर मात्र 10 वर्षों के लिए ही किसी ग़ैर कांग्रेसी पार्टी या दल की सरकार रही, वरना पूरे 62 सालों तक इण्डिया पर कांग्रेस का राज रहा। फिर भी कांग्रेस सरकार इन 62 सालों में इतने साधन नहीं जुटा पायी की भारतीयों को अपनी आजीविका कमाने के चक्कर में देश छोड़ कर विदेश ना जाना पड़े। इसी पलायन के चलते हुए इंडिया को ये तमगा दिया गया कि यहां से ब्रेन ड्रेन होता है। आज राहुल गांधी उन प्रवासी भारतीयों को कहते हैं आप कांग्रेस का साथ दो और 2019 में भारत में कांग्रेस की सरकार बनाओ। लेकिन राहुल गांधी ये नहीं समझ पाते कि जो बात वो अपने भाषणों में कहते हैं, कि अमरीका भी मानता है कि उसका मुक़ाबला सिर्फ़ भारत या चीन कर सकता है, तो ये बात अमेरिका किस वजह से कहता है। अब से पहले अमेरिका या अन्य देश ने ऐसा क्यों नहीं कहा? हिंदुस्तान में राहुल गांधी अपने कार्यकर्ताओं से कहते हैं कि आप बब्बर शेर हो आप डटकर लड़ो और दुबई में कहते हैं कि भैया हम तो गांधी परिवार से हैं हम हिंसा में विश्वास नहीं रखते। साथ में राहुल गांधी देश की जनता के अलावा दुबई में रहने वाले हिन्दुस्तानियों को भी लालच दे आये। राहुल बोले कि अगर 2019 में कांग्रेस की सरकार बनी तो आंध्रा प्रदेश को विशेष राज्य का दर्ज़ा दिया जायेगा। राहुल ये भी बोले की मैं यहाँ मन की बात नहीं करने आया हूँ, मन की बात सुनने आय हूं। इसके बाद डेढ़ घंटे तक राहुल गांधी लगातार जनता को सुनाते रहे।

लेकिन सोचने वाली बात है कि अगर ये 40-45 साल की अवस्था वाले नेता अपने आप को युवा कहने लग जायेंगे तो आप और हम जैसे 20-25 साल वाले स्त्री-पुरुष तो फिर नाबालिगों की श्रेणी में आ जायेंगे, और इन्हीं नाबालिगों को लालच देकर कांग्रेस वोट मांग रही है कि “तुम हमें वोट दो, हम तुम्हें रोज़गार देंगे।“ लेकिन फिर एक और सवाल उठता है, अगर 40-45 साल वाले युवा और 20-25 साल वाले नाबालिग तो क्या कांग्रेस उनको रोज़गार देकर उनसे बाल मज़दूरी नहीं करवाएगी। सोचनीय बिंदु है !

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Author : Mahendra

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