राजस्थान पुलिस ने आम नागरिकों के लिए एक महत्वपूर्ण साइबर सुरक्षा चेतावनी जारी की है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि ऑनलाइन खरीद-बिक्री या पैसे लेने-देने के दौरान कभी भी अपना UPI पिन किसी के साथ साझा न करें। पुलिस के आधिकारिक हैंडल पर जारी पोस्ट में साफ कहा गया है कि पैसे प्राप्त करने के लिए सिर्फ अपना QR कोड भेजना होता है, UPI पिन की जरूरत बिल्कुल नहीं पड़ती। यह चेतावनी उन हजारों मामलों को देखते हुए दी गई है, जहां साइबर ठग फर्जी लिंक या QR कोड भेजकर लोगों को पिन डालने के लिए फंसा रहे हैं।

UPI का सबसे बुनियादी नियम याद रखें

राजस्थान पुलिस ने दोहराया कि UPI सिस्टम का सबसे महत्वपूर्ण और सरल नियम यही है – पिन सिर्फ पैसे भेजने के लिए होता है, पाने के लिए नहीं। जब कोई व्यक्ति आपके खाते में पैसे भेजना चाहता है तो उसे सिर्फ आपका QR कोड या UPI आईडी चाहिए होती है। पैसे प्राप्त करने के लिए आपको कभी भी अपना पिन दर्ज नहीं करना पड़ता। ठग इसी मूलभूत बात का फायदा उठाते हैं।

ऑनलाइन खरीद-बिक्री में कैसे फंसाते हैं ठग?

पुलिस के अनुसार, ऑनलाइन सामान बेचते या खरीदते समय साइबर अपराधी अक्सर “पेमेंट भेजने” का झांसा देते हैं। वे फर्जी QR कोड या पेमेंट लिंक भेजते हैं और पीड़ित से कहते हैं कि “पैसे भेजने के लिए पिन डालो” या “स्कैन करो”। कई बार वे कॉल करके भी दबाव बनाते हैं। जैसे ही व्यक्ति पिन डालता है, उसके खाते से पैसे ट्रांसफर हो जाते हैं। पुलिस ने साफ चेतावनी दी है कि पैसे देने के बहाने QR कोड स्कैन कराना पूरी तरह फ्रॉड है।

सुरक्षित रहने के चार सुनहरे नियम

राजस्थान पुलिस ने नागरिकों के लिए चार महत्वपूर्ण सुरक्षा नियम बताए हैं। इन नियमों का पालन करने से अधिकांश साइबर फ्रॉड रोके जा सकते हैं।

  • UPI पिन की जरूरत केवल पैसे भेजने के लिए होती है।
  • खाते में पैसे प्राप्त करने के लिए कभी भी पिन न डालें।
  • पैसे देने के बहाने QR कोड स्कैन कराना पूरी तरह धोखाधड़ी है।
  • संदिग्ध लिंक या पिन मांगने वाले कॉल से हमेशा बचें।

धोखाधड़ी होने पर तुरंत करें ये काम

अगर किसी के साथ ऐसी साइबर धोखाधड़ी हो जाए तो बिना देर किए तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। इसके अलावा व्हाट्सऐप नंबर 9256001930 और 9257510100 पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। ऑनलाइन शिकायत के लिए आधिकारिक पोर्टल का लिंक भी पुलिस ने उपलब्ध कराया है।