"राजस्थान का जेन-Z अशोक गहलोत के लिए बेताब हो सकता है", लेखक बोले- पेपर लीक पर क्रांत‍ि कर सकता है 

जयपुर ल‍िटरेचर फेस्ट‍िवल के चारबाग में आयोजित जेन Z, मिलेनियल्स और मम्मीजी सेशन में संतोष देसाई ने कहा कि भारत महाशक्तियों में से एक है, लेकिन परिवर्तन का कड़ा विरोध करने की उसकी अद्भुत क्षमता है. उन्होंने बताया कि भारतीय समाज ने खुद को इस तरह ढाला है कि प्रगति तो चाहता है, पर असल बदलाव से कतराता है. यह आज का केंद्रीय मुद्दा है. हम विकास की बातें सुनना पसंद करते हैं, लेकिन मूलभूत परिवर्तन का विरोध करते हैं.

“समाज ने राजनीति को बदल दिया”  

डिजिटल संस्कृति इसे दिलचस्प बनाती है, क्योंकि व्यक्तिगत स्तर पर यह क्रांतिकारी है, हालांकि छोटे-मोटे विरोध आंदोलन भी होते रहते हैं. राजनीति का मकसद समाज बदलना था, लेकिन समाज ने राजनीति को पूरी तरह बदल दिया. समाज सुधार के संस्थान अब राजनीति से प्रभावित है

 “हर राज्य की अपनी वर्ग-जातिगत दुनिया है”

अनुराग माइनस वर्मा ने कहा कि दिल्ली का जेन Z टेलर स्विफ्ट कॉन्सर्ट के लिए उतावला हो सकता है. हरियाणा का सपना चौधरी के लिए मुंबई का जोहरान ममदानी के लिए और राजस्थान का अशोक गहलोत के लिए बेताब हो सकता है. हर राज्य की अपनी वर्ग-जातिगत दुनिया है, इसलिए समान आकांक्षाओं को एकजुट करना मुश्किल है.

“राष्ट्रीय स्तर पर जेन-Z प्रभावशाली नहीं”

जेन Z कोई एकसमान श्रेणी नहीं जो राष्ट्रीय क्रांति ला सके. हालांकि, राज्य स्तर पर वे सक्रिय हैं. राजस्थान-बिहार में पेपर लीक के विरोध में जेन Z के नेतृत्व वाली ‘क्रांतियां’ हुईं. पेपर लीक जैसी घटनाओं पर वे व्यवस्था से लड़ते हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर इतना प्रभावशाली नहीं कि इसे बड़ी क्रांति कहा जाए.