
शिक्षा हर किसी के लिए जरूरी है कि सबसे पहले सरकार को शिक्षा पर निवेश और बढ़ाना होगा। राजस्थान में 2023-24 के बजट में शिक्षा पर कुल खर्च राज्य की जीडीपी का लगभग 2.8% रहा है, जो कि अभी भी पर्याप्त नहीं माना जा सकता है। ग्रामीण इलाकों में खासकर लड़कियों के लिए सुरक्षित परिवहन, साइकिल योजना और स्कूलों में शौचालय जैसी सुविधाओं को प्राथमिकता देनी होगी। दूसरे, समाज को यह समझना होगा कि शिक्षा सिर्फ लड़कों के लिए नहीं, बल्कि लड़कियों के लिए भी उतनी ही जरूरी है। इसके लिए ग्रामीण स्तर पर सामुदायिक रूप से पहल करनी होगी। जिसमें पंचायत स्तर पर निगरानी, इस दिशा में बड़ा योगदान दे सकती हैं। जब समाज खुद यह जिम्मेदारी लेगा कि गांव की हर लड़की स्कूल जाएगी, तभी वास्तविक बदलाव आएगा। तीसरे, स्कूलों को भी अपनी भूमिका निभानी होगी। शिक्षकों को संवेदनशील और लैंगिक समानता के प्रति जागरूक बनाना जरूरी है। कई बार लड़कियाँ स्कूल इसलिए भी छोड़ देती हैं क्योंकि वहाँ उन्हें प्रोत्साहन और समर्थन नहीं मिलता है। यदि शिक्षक लड़कियों को बराबरी का माहौल देंगे, तो उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित होंगी।
समाधान केवल नीतियों या योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सोच में बदलाव का सवाल है। जब हम यह मान लेंगे कि शिक्षा लड़कियों का भी उतना ही अधिकार है जितना लड़कों का, तभी इस समस्या का हल निकलेगा और यह बदलाव केवल सरकार या किसी संस्था से नहीं आएगा, बल्कि यह हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी से संभव होगा। शायद तब जाकर हम समाज में सभी के लिए बराबरी की बात को हकीकत में बदल पाएंगे।
क्यों लड़कियों को ही स्कूल पहुंचने में चुनौती आती है.? लुणकरणसर की जशोदा सहित उनके समुह ने उठाया सामाजिक मुद्दा 





