
जयपुर। राजस्थान में कोरोना संक्रमण के बीच एक नई मुसीबत आन पड़ी है। प्रदेश में मेडिकल कॉलेज के रेजीडेंट डॉक्टर्स हड़ताल की तैयारी में है। कोविड-19 और ब्लैक फंगस महामारी महामारी के बीच ही अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदेशभर के रेजिडेंट्स डॉक्टर्स ने आज दो घंटे हड़ताल की। रेजिडेंट्स डॉक्टर्स ने आज सुबह 8 से 10 बजे तक संपूर्ण कार्य बहिष्कार का निर्णय लिया है। करीब डेढ़ साल से कोरोना से लड़ने में रेजीडेंट डॉक्टर्स ही सबसे आगे रहे हैं। इसके बाद भी राजस्थान के रेजीडेंट डॉक्टर्स देश के अधिकांश राज्यों की तुलना में कम ही नहीं बल्कि कुछ राज्यों से तो आधा वेतन ही पा रहे हैं।
अन्य राज्यों की तुलना में रेजीडेंट डॉक्टरों को कम वेतन
राजस्थान में रेजीडेंट डॉक्टर्स को मिलने वाला वेतन अन्य राज्यों की तुलना में कम है। यह समस्या मुख्य रूप से उन रेजीडेंट डॉक्टर्स के साथ है जो एमबीबीएस करने के साथ ही पीजी में प्रवेश ले चुके हैं। वहीं जो इनसर्विस कोटे से आये हैं, उन्हें पूरा वेतन मिल रहा है। राजस्थान में फ्रेश रेजीडेंट्स को लास्ट इयर में भी 57890 रुपए मिल रहे हैं जबकि हरियाणा में 77 हजार, आसाम में 72 हजार, मणिपुर में 79 हजार, ओडिसा में 71 हजार, उत्तरप्रदेश में 84 हजार, झारखंड में 85 हजार रुपए, मेघालय में 98 हजार रुपए, बिहार में 84 हजार रुपए मिल रहे हैं।
ये है प्रमुख मांगे
PG बैच 2018 की परीक्षा मई माह के अंत तक करवाए या वन टाइम रिलेक्सेशन देते हुए सभी को इंटरनल असेसमेंट के आधार पर प्रमोट किया जाए। इसके अलावा रेजीडेंट्स को मिलने वाला स्टाइपेंड रिवाइज्ड किया जाए और एक कमेटी का गठन करें तो हर 3-4 साल में स्टाइपेंड को रिवाइज्ड करें। सरकार की ओर से घोषित कोविड इंसेन्टीव राशि 5 हजार रुपए के आदेश शीघ्र जारी किए जाए। कोविड महामारी में ड्यूटी के बाद 7 दिन क्वारंटाइन लीव दिया जाए।
इंटर्न डॉक्टर्स भी हड़ताल की तैयारी में
प्रदेश में रेजीडेंट्स के साथ इंटर्न डॉक्टर्स भी हड़ताल की तैयारी में है। साढ़े चार साल एमबीबीएस करने के बाद इन डॉक्टर्स को वेतन नहीं बल्कि स्टाईपेंड दिया जाता है। वर्तमान में महीने का सिर्फ सात हजार रुपए दिया जा रहा है जो औसतन हर रोज करीब 233 रुपए है। सरकार ने दो साल पहले इन डॉक्टर्स की एसोसिएशन के साथ 14 हजार रुपए व डीए देने का वादा किया था लेकिन आज तक ये वादा पूरा नहीं हो पाया।
चरमराई व्यवस्थाएं
सुबह रेजीडेंट्स के हड़ताल पर चले जाने के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। जिससे आउटडोर से लेकर वार्डो तक मरीज परेशान होते रहे। वहीं अस्पतालों की इमरजेंसी सेवाएं भी बुरी तरह से प्रभावित होती रहीं। सवाई मानसिंह अस्पताल के रेजीडेंट्स हड़ताल पर चले गए, जिससे आउटडोर की व्यवस्थाएं तो प्रभावित होती ही रही, सबसे ज्यादा परेशानी वार्डो में भर्ती मरीजों को हुई। सुबह अस्पताल के किसी भी वार्ड में जूनियर रेजीडेंट्स नहीं थे। लिहाजा मरीज रूटीन जांच व दवाइयां लिखवाने के लिए रेजीडेंट्स को तलाशते रहे। ऎसे ही हालात अस्पताल की इमरजेंसी में भी थे।
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