पटरियों पर बैठे गुर्जर आरक्षण आंदोलनकारी
पटरियों पर बैठे गुर्जर आरक्षण आंदोलनकारी

गुर्जरों की पांच फीसदी आरक्षण की मांग को आज 8 दिन पूरे हो गए हैं और आरक्षण बिल पास भी हो गया है लेकिन गुर्जरों का रेलवे ट्रेक व सड़कों पर पर लगा महापड़ाव अभी तक समाप्त नहीं हुआ है। गुर्जरों से सरकार की एक वार्ता विफल हो चुकी है और दूसरी राजधानी में चल रही है लेकिन अभी तक प्रदेश की जनता के साथ राजस्थान भी बे’बस है। गुर्जर आंदोलन के चलते रेल और बस-ट्रक का आवागमन पिछले एक हफ्ते से पूरी तरह बाधित है जिसका असर दूध, आलू, प्याज और अन्य सब्जियों एवं प्रतिदिन काम आने वाली चीजों पर पड़ रहा है। यहां तक की विदेशी पर्यटक तक मरूभूमि में आने से कतरा रहे हैं। वजह है-दिल्ली-आगरा-जयपुर रेलवे व सड़क मार्ग पर आवागमन पूरी तरह से ठप है।

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13 सालों से गुर्जरों की चली आ रही पांच फीसदी आरक्षण की मांग को लेकर गुर्जर आंदोलनकारी शुक्रवार से डटे हुए हैं। आगरा सहित दिल्ली-मुबंई रेलवे ट्रैक पर जहां सवाई माधोपुर जिले के मलारना डूंगर में आंदोलनकारियों का महापड़ाव जारी है। वहीं विभिन्न राजमार्गों पर लगाए गए जाम भी यथावत हैं। रोडवेज बसों सहित प्राइवेट वाहनों का संचालन पूरी तरह से बंद है। राजस्थान विश्वविद्यालय की परीक्षाएं भी गुर्जर आंदोलन और बंद की भेंट चढ़ चुकी है।

बता दें, गुरुवार को आईएएस नीरज के.पवन ने सरकार की तरफ से मलारना डूंगर में महापड़ाव स्थल पर जाकर आरक्षण को लेकर पारित किए गए विधेयक, शासकीय संकल्प और गजट नोटिफिकेशन की प्रतियां गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला को सौंपी थी। उसके बाद संघर्ष समिति ने कहा था कि इनका अध्ययन करने के बाद आंदोलन को लेकर निर्णय लिया जाएगा लेकिन अभी तक स्थिति यथावत बनी हुई है।

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