भाजपा के वरिष्ठ नेता गुलाबचंद कटारिया को असम का राज्यपाल बनाए जाने के सम्मान में पूर्व मुख्यमंत्री व भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसुंधरा राजे ने जयपुर के सिविल लाइंस स्थित अपने सरकारी आवास पर चाय-नाश्ते का कार्यक्रम आयोजित किया। कटारिया को बधाई देने के साथ ही राजे ने बीजेपी विधायकों से मिलने के लिए यह कार्यक्रम आयोजित किया था। सियासी गलियारों में इसे वसुंधरा राजे की ब्रेकफास्ट डिप्लोमेसी के तौर पर देखा जा रहा है। बीजेपी के मौजुदा 70 विधायकों में से 65 विधायक इस कार्यक्रम पहुंचे। राजे ने सभी से ग्रुप में चर्चा की।

बीजेपी के मौजुदा 70 विधायकों में से 65 विधायक पहुंचे

बीजेपी के वर्तमान 70 विधायकों में से 65 विधायकों का उनके आवास पर पहुँचना राजे के नेतृत्व में एक जुट होने का मैसेज देता हुआ साफ तौर पर दिख रहा है। 65 विधायकों ने एक सुर में राजे के साथ होने की बात कही और कहा कि आने वाले 2023 के विधानसभा चुनाव में भी वह वसुंधरा राजे के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े है और आगे भी खड़े रहेगें। वसुंधरा राजे की बीजेपी संगठन में गजब पकड़ होने के साथ-साथ प्रदेश की जनता, खासकर महिलाओं और युवा वर्ग में तो उनकी जबरदस्त अपील है, जो किसी और की है नहीं। फिर हर जिले में उनके अपने लोग हैं और जिलों में मजबूत नेता सबसे ज्यादा उन्हीं के साथ हैं। लोकप्रियता के मामले में भी प्रदेश का कोई और नेता राजे के मुकाबले कहीं नहीं ठहरता।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया, उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़, विधायक प्रताप सिंह सिंघवी, सूर्यकांत व्यास, कालीचरण सराफ, अनीता भदेल, वासुदेव देवनानी, पूर्व विधायक शंकर सिंह राजपुरोहित समेत कई भाजपा विधायक व पूर्व विधायक राजे के आवास पहुंचे। वसुंधरा राजे ने एक-एक कर उनसे मुलाकात की। नाश्ते के लिए सादर आमंत्रित किया। इसके साथ राजे ने सभी से ग्रुप में चर्चा की।

वसुंधरा राजे ने गुलाबचंद कटारिया को भगवान की मूर्ति और गुलाबी फूलों का खूबसूरत गुलदस्ता भेंट किया और कटारिया को शाल ओढ़ाकर उनका सम्मान किया। इस मौके पर वसुंधरा राजे ने सभी विधानसभा सदस्यों से बातचीत की और कटारिया को राज्यपाल पद की जिम्मेदारी के लिए अग्रिम शुभकामनाएं दीं। अब नेता प्रतिपक्ष की सीट के खाली हो जाने के बाद बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा इस सीट के लिए उमीदवार की तलाश शुरू कर दी है। लेकिन राजस्थान का पेंच अभी भी वसुंधरा राजे के ही ईर्द-गिर्द घूमता नजर आ रहा है।

दिग्गज नेता भैरोंसिंह शेखावत अब इस लोक में नहीं है, फिर भी राजस्थान की राजनीति में उनके नाम और सम्मान की हैसियत किसी भी जीवित नेता के मुकाबले बहुत ज्यादा मानी जाती है। लेकिन शेखावत के निधन के बाद सतीश पूनिया, राजेंद्र राठोड़, गजेंद्रसिंह शेखावत, अर्जुन मेघवाल, राज्यवर्द्धन राठोड़, ओम माथुर व ऐसे ही कुछ और दिग्गज नेताओं की लंबी चौड़ी फौज होने के बावजूद बीजेपी के नेता के रूप में पूरे प्रदेश में समान रूप से स्वीकारोक्ति वसुंधरा राजे की ही सबसे ज्यादा है।

राजे ने भरा भाजपा में दम

राजस्थान में भैरोंसिंह शेखावत के बाद वसुंधरा ने जिस कुशलता से प्रदेश की कमान संभाली, उससे राजे की छवि राजस्थान में ही नहीं बल्कि देश में भी एक सधी हुई नेता के रूप में बनीं। यह उनकी कार्यकुशलता का ही प्रमाण है कि वर्ष 2003 के विधानसभा चुनावों की जिम्मेदारी केन्द्रीय नेतृत्व ने राजे को सौंपी तथा उस विश्वास पर खरे उतरते हुए वसुंधरा ने 120 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत से सरकार बनाई। वर्ष 2008 के विधानसभा चुनावों में मामूली हार के बाद वसुंधरा को सर्वसम्मति से नेता प्रतिपक्ष बनाया गया। इसके बाद वर्ष 2013 का विधानसभा चुनाव भी वसुंधरा राजे के नेतृत्व में ही लड़ा गया और पार्टी ने 163 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत की सरकार बनाई। आलाकमान ने दोनों चुनावों में जीत का सेहरा वसुंधरा राजे के सिर बांधा और उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में बड़ी जिम्मेदारी सौंपी।

वसुंधरा का नहीं है कोई विकल्प

पिछले विधानसभा चुनावों में भाजपा की हार के बाद केन्द्रीय नेतृत्व अब राजस्थान की कमान नए हाथों में सौंपना चाहता है। लेकिन मोदी-शाह की टीम को वसुंधरा राजे के अलावा प्रदेश में अन्य कोई विकल्प भी नजर नहीं आ रहा है। मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष के रूप में राजे के राजनीतिक अनुभव के सामने बाकि सभी नवनिर्वाचित भाजपा विधायक फीके पड़ते नजर आ रहे हैं। केन्द्र भले ही राजस्थान में वसुंधरा का विकल्प खोजने पर ऊतारू है लेकिन वो इस बात से भी भलिभांति परिचित है कि 2024 का लोकसभा व 2023 का विधानसभा चुनाव वसुंधरा राजे के बिना जीतना संभव नहीं है।

राठौड़ का दामन दागदार

मीडिया खबरों की मानें तो नेता प्रतिपक्ष के लिए भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व राजेन्द्र राठौड़ के नाम पर भी विचार कर रहा है। राजस्थान की राजनीति में भूचाल लाने वाले दारां सिंह एनकाउंटर मामले में फंसे राठौड़ पर दांव खेलना मुश्किल लग रहा है। और अन्य नेताओं की छवि वसुंधरा राजे जितनी स्वच्छ और लोकप्रिय नहीं है।

गुलाबचंद कटारिया ने भी असम का राज्यपाल बनने के बाद वसुंधरा राजे को लेकर कहा कि राजे भारतीय जनता पार्टी की लीडर है। दो बार मुख्यमंत्री रही हैं। पार्टी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। मैं सोचता हूँ कि उनकी भूमिका पहले भी थी, आज भी है और आगे भी रहनी चाहिए। बीजेपी के वर्तमान 70 विधायकों में से 65 विधायकों का उनके आवास पर पहुँचना राजे के नेतृत्व में एक जुट होने का मैसेज देता हुआ साफ तौर पर दिख रहा है। 65 विधायकों ने एक सुर में राजे के साथ होने की बात कही और कहा कि आने वाले 2023 के विधानसभा चुनाव में भी वह वसुंधरा राजे के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े है और आगे भी खड़े रहेगें।