जयपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक बाबूलाल ने भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और सामाजिक समरसता को राष्ट्र निर्माण का आधार बताते हुए समाज से अपनी प्राचीन परंपराओं एवं मर्यादाओं को पुनर्जीवित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि परिवार केवल एक सामाजिक इकाई नहीं बल्कि संस्कार संस्कृति और राष्ट्रभावना की पहली पाठशाला है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में परिवार संस्था को मजबूत बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। इसी संदर्भ में उन्होंने परिवारों में कम से कम तीन बच्चों के महत्व पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज को दीर्घकालिक दृष्टि से अपने सांस्कृतिक और सामाजिक संतुलन पर ध्यान देना चाहिए।

बाबूलाल ने कहा कि भारतीय सभ्यता सदैव मजबूत पारिवारिक व्यवस्था और उच्च जीवन मूल्यों के कारण विश्व में विशिष्ट पहचान रखती रही है। यदि हम अपनी जड़ों, संस्कारों और परंपराओं से जुड़े रहेंगे तो आने वाली पीढ़ियां भी राष्ट्र और समाज के प्रति अपने दायित्वों का बेहतर निर्वहन कर सकेंगी।

उन्होंने समाज के सभी वर्गों से परिवार, संस्कृति और राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान करते हुए कहा कि सशक्त परिवार ही सशक्त समाज का निर्माण करते हैं और सशक्त समाज ही एक शक्तिशाली राष्ट्र की नींव रखता है।