राजस्थान विधानसभा के बजट सेशन में मंगलवार को कोर्ट बनाने और जस्टिस सिस्टम को लेकर सदन का माहौल गरमा गया. राज्य के झालावाड़ के खानपुर में एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कोर्ट (ACJM) खोलने की मांग को लेकर कांग्रेस MLA सुरेश गुर्जर और कानून मंत्री जोगाराम पटेल के बीच बहस देखने को मिली. बहस इतनी बढ़ गई कि नेता विपक्ष टीकाराम जूली और सत्ता पक्ष के दूसरे सदस्य भी आमने-सामने आ गए.

 

9 साल का इंतजार और 4700 लंबित मुकदमे

प्रश्नकाल के दौरान MLA सुरेश गुर्जर ने कहा कि खानपुर में ACJM कोर्ट का प्रस्ताव भेजे हुए 9 साल हो गए हैं. यहां 4700 से ज़्यादा सिविल और क्रिमिनल केस पेंडिंग हैं. कोर्ट की बिल्डिंग भी बनकर तैयार है. क्या आने वाले बजट में ACJM कोर्ट खोलने का आपका कोई आइडिया है?

 

हाईकोर्ट की सहमति पर फंसा है पेंच

इस सवाल का जवाब देते हुए कानून मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि इस बारे में एक प्रस्ताव 8 दिसंबर 2014 को ACJM कोर्ट को भेजा गया था. बार-बार अनुरोध करने के बावजूद अभी तक वहां से कोई जवाब नहीं आया है. मंत्री ने सदन को भरोसा दिलाया कि वह जल्द ही एक बार फिर हाई कोर्ट से सहमति के लिए अनुरोध करेंगे.

 

प्रस्ताव भेजने का कोई फिक्स नंबर नहीं हो सकता

इसके बाद विधायक ने मंत्री से पूछा कि पिछले दो साल में कितने ACJM कोर्ट बनाए गए और पूछा कि सरकार को कब और कितने प्रस्ताव भेजे गए? हाई कोर्ट को भेजे गए प्रपोजल में से कितने मंजूर हुए? इस पर मंत्री जोगाराम ने कहा कि यह बताना मुश्किल है कि कितने प्रपोजल समय-समय पर भेजे गए. प्रस्ताव भेजने का एक प्रोसेस होता है. इसके लिए समय-समय पर रिकमेंडेशन भेजी जाती हैं, इसलिए इसका कोई फिक्स नंबर नहीं हो सकता. जैसे-जैसे प्रपोज़ल मिलते हैं, कोर्ट खोल दिए जाते हैं.