जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल- 2026′ में आज (18 जनवरी) गीतकार प्रसून जोशी ने एआई पर चर्चा की. उन्होंने कहा कि आर्टिफिशल इंटेलिजेंस को आर्टिफिशियल नहीं कहा जाना चाहिए. क्योंकि यह सभी इंसानों के अनुभव ही है, इसलिए मैं उसे आर्टिफिशियल नहीं मानता. एआई ने हमें कई क्षेत्रों में बहुत कुछ दिया है. लेकिन जब क्रिएटिविटी की बात आती है तो मुझे लगता है. अगर आप कुछ आउट ऑफ द बॉक्स चाहेंगे तो वह नहीं मिलेगा. मुझे कभी ऐसा लगा नहीं कि कुछ ऐसा कभी एआई से आया हो, जिसने मुझे ऐसे चौंका दिया हो. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आपको यह महसूस करवाता है कि यह एक्सेप्शनल बात है. लेकिन एक्सेपशनल बात तो अब तक कही ही नहीं गई.

 

भाषा हिंदी है, अंग्रेजी मेरा हुनर- प्रसून जोशी

उन्होंने कहा, “आज के समय में लोग अपनी मातृभाषा में बात करने में कंफर्टेबल है. लेकिन एक वक्त ऐसा दौर था, जब कंपनियां के रिसेप्शन पर ऐसी अंग्रेजी बोलते थे. आपका कॉन्फिडेंस कम हो जाता था, मैं खुश हूं कि आज हम विचारों को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं. आज जब भी मुझसे कोई पूछता है, आपकी भाषा कौनसी है. तो मैं जवाब देता था कि भाषा तो मां ही होती है, इसलिए भाषा मेरी हिंदी ही है. अंग्रेजी मेरा हुनर है.

हमारी भाषा बोलने को एचएमटी कहते थे”

उन्होंने कहा कि आज मैं भगवान की कृपा से ऐसी जगह पर हूं, जब मैं बोल सकता हूं और लोग सुनते हैं. लेकिन हमेशा ऐसा नहीं था. हमें देखना होगा कि हमारे अपने ही लोग है, जो हमारी भाषा बोलने वाले को एचएमटी हिंदी मीडियम टाइप कहते थे. मुझे दिक्कत नहीं कि एसएमएस हमारी भाषा में आना चाहिए या नहीं.

 

गीतकार ने कहा कि लेकिन अगर वह संदेश शब्द की हत्या करके आएगा तो मुझे ये मंजूर नहीं है. जहां संदेशे आते हैं, वहां संदेशे ही आएंगे. इस दौरान उन्होंने मेरी मां गाना भी गया, जिसे सुन कर दर्शक उत्सुक हो उठे. उन्होंने कहा कि मां विषय पर लिखने पर मुझे बहुत प्यार मिला. इस विषय पर जितना लिखा जाए, उतना कम है.