देश भर में ‘कोचिंग नगरी’ के नाम से मशूहर राजस्थान के कोटा (Kota) शहर को अब एक और नई पहचान मिल गई है. कोटा अब दुनिया का वह दूसरा शहर बन गया है जहां मुख्य सड़कों और चौराहों पर ट्रैफिक लाइट्स (2nd Signal Free City in World) नहीं हैं. यह अनूठा ट्रैफिक सिग्नल-फ्री मॉडल शहर के आवागमन को इतना सुगम बना चुका है कि अब इस शहर के चर्चे दुनिया के नक्शे पर होने लगे हैं. कोटा की यह उपलब्धि तब सुर्खियों में आई, जब प्रसिद्ध उद्योगपति और महिंद्रा समूह के अध्यक्ष आनंद महिंद्रा (Anand Mahindra) इस व्यवस्था से प्रभावित होकर अपनी प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर दी. शहरवासी इस मॉडल को लेकर बेहद गर्व महसूस करते हैं, जिसे पूर्व सरकार के एक बड़े विजन का नतीजा बताया जा रहा है.

कैसे मिली ट्रैफिक सिग्नल से मुक्ति?

कोटा पहले औद्योगिक नगरी था, फिर कोचिंग हब बना. जैसे-जैसे आबादी और वाहनों की संख्या बढ़ी, यातायात का दबाव भी तेजी से बढ़ा. शहर को भविष्य के लिहाज से तैयार करने के लिए, पूर्व सरकार में यूडीएच (UDH) मंत्री शांति धारीवाल ने एक बड़ा विकास विजन सामने रखा. उन्होंने अधिकारियों के साथ मिलकर एक ऐसा प्रोजेक्ट तैयार किया, जिसका मॉडल भूटान की राजधानी थिंपू को बनाया गया. थिंपू ही दुनिया का एकमात्र शहर था जहां कोई ट्रैफिक सिग्नल नहीं है.

कोटा बना दुनिया का दूसरा ‘सिग्नल-फ्री’ शहर! चौराहों पर नहीं रुकती गाड़ियां, आनंद महिंद्रा भी हुए मुरीदकोटा ने भूटान की राजधानी थिंपू के बाद दुनिया में दूसरा शहर होने का गौरव हासिल किया है, जहां चौराहों पर रुकने की मजबूरी खत्म हो गई है. पूर्व मंत्री शांति धारीवाल के विजन और अधिकारियों की मेहनत ने कोटा को विश्व मानचित्र पर एक नई और सकारात्मक पहचान दिलाई है.

: देश भर में ‘कोचिंग नगरी’ के नाम से मशूहर राजस्थान के कोटा (Kota) शहर को अब एक और नई पहचान मिल गई है. कोटा अब दुनिया का वह दूसरा शहर बन गया है जहां मुख्य सड़कों और चौराहों पर ट्रैफिक लाइट्स (2nd Signal Free City in World) नहीं हैं. यह अनूठा ट्रैफिक सिग्नल-फ्री मॉडल शहर के आवागमन को इतना सुगम बना चुका है कि अब इस शहर के चर्चे दुनिया के नक्शे पर होने लगे हैं. कोटा की यह उपलब्धि तब सुर्खियों में आई, जब प्रसिद्ध उद्योगपति और महिंद्रा समूह के अध्यक्ष आनंद महिंद्रा (Anand Mahindra) इस व्यवस्था से प्रभावित होकर अपनी प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर दी. शहरवासी इस मॉडल को लेकर बेहद गर्व महसूस करते हैं, जिसे पूर्व सरकार के एक बड़े विजन का नतीजा बताया जा रहा ह

कोटा की मुख्य सड़कों, चौराहों और तिराहों की विस्तृत मैपिंग की गई. उन सभी स्थानों को चिन्हित किया गया जहां ट्रैफिक लाइट की जरूरत थी या यातायात का अधिक दबाव था. इन जगहों पर यातायात को निर्बाध बनाने के लिए फ्लाईओवर और अंडरपास डिजाइन किए गए. साल 2020 से 2023 के बीच इस प्रोजेक्ट पर लगभग ₹250 करोड़ खर्च हुए और इसे पूरा करने में 3 साल का समय लगा. कोटा में कुल 3 अंडरपास और 3 फ्लाईओवर सहित कई एलिवेटेड रोड बनाए गए, जिनमें से अधिकांश का निर्माण एक साथ पूरा किया गया.