राजस्थान के पंचायत चुनाव अब पूरी तरह चुनावी मोड में प्रवेश कर चुके हैं. नामांकन प्रक्रिया के अंतिम चरण में जहां राजनीतिक दल अपने उम्मीदवारों को मैदान में उतार रहे हैं, वहीं कई इलाकों में बागी तेवर और स्थानीय समीकरण चुनावी मुकाबलों को दिलचस्प बना रहे हैं. सीकर में भाजपा के वरिष्ठ मंत्री झाबर सिंह खर्रा के बेटे दुर्गा सिंह खर्रा के निर्दलीय नामांकन ने नई चर्चा छेड़ दी है. दूसरी ओर बाड़मेर में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) ने चुनावी ताकत झोंक दी है और कांग्रेस ने भी जिला परिषद चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है.

श्रीमाधोपुर में मंत्री के बेटे की निर्दलीय दावेदारी की चर्चा
सीकर जिले की श्रीमाधोपुर पंचायत समिति में उस समय राजनीतिक हलचल तेज हो गई जब प्रदेश के नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा के पुत्र दुर्गा सिंह खर्रा ने वार्ड संख्या-19 से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल कर दिया. दुर्गा सिंह खर्रा ने रिटर्निंग अधिकारी एवं एसडीएम सौरव भाम्बू के समक्ष अपना नामांकन प्रस्तुत किया. मंत्री के पुत्र के निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरने से स्थानीय भाजपा संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है.

 

उन्होंने कहा कि यदि वे पार्टी टिकट पर चुनाव लड़ते तो कई लोग साथ नहीं आते, जबकि निर्दलीय रूप में उतरने पर कार्यकर्ता उनके साथ खड़े होने को तैयार थे. दुर्गा सिंह ने स्पष्ट किया कि उनका परिवार जनसंघ के समय से पार्टी की विचारधारा से जुड़ा रहा है और वैचारिक रूप से उनका रुख आज भी वही है.

भाजपा कार्यकर्ताओं की नाराजगी को बताया वजह

दुर्गा सिंह खर्रा ने कहा कि निर्दलीय लड़ने का फैसला भाजपा की विचारधारा से दूरी नहीं बल्कि स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं की भावनाओं का सम्मान है. उनका कहना है कि कार्यकर्ताओं की इच्छा सर्वोपरि है और आगे की रणनीति भी उनसे चर्चा के बाद तय की जाएगी. उन्होंने संकेत दिया कि चुनाव के बाद पूरे घटनाक्रम की समीक्षा की जाएगी और पार्टी कार्यकर्ताओं से संवाद भी होगा.

उन्होंने कहा, “बीजेपी से कई लोगों को एलर्जी है. यह लोकतंत्र है, इसमें सबका मौलिक अधिकार है. मैं किसी के मौलिक अधिकार का हनन नहीं कर सकता. वो उनकी अपनी सोच है.” वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा “चौथी बार गहलोत सरकार” जैसे नारों से दूरी बनाने के मुद्दे पर राठौड़ ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को यह नारा पसंद नहीं है. उन्होंने दावा किया कि डोटासरा और गहलोत के बीच राजनीतिक मतभेद हैं और इसी वजह से अब गहलोत स्वयं इस नारे को लगाने से मना कर रहे हैं.

अन्य उम्मीदवारों ने भी भरे नामांकन

श्रीमाधोपुर पंचायत समिति में अन्य उम्मीदवारों ने भी नामांकन दाखिल किए हैं. वार्ड संख्या 4 से निर्दलीय उम्मीदवार उगंता वर्मा, वार्ड संख्या 8 से कांग्रेस प्रत्याशी प्रभाती देवी, वार्ड संख्या 3 से कमला देवी तथा वार्ड संख्या 5 से भाजपा प्रत्याशी जगदीश वर्मा ने चुनावी मैदान में दावा पेश किया है. नामांकन प्रक्रिया पूरी होने और नाम वापसी की अंतिम तारीख के बाद क्षेत्र में मुकाबले की तस्वीर स्पष्ट होगी