
बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन होगा इस पर लंबे समय से कयासबाजी चल रहा है. जितने ‘सूत्र’ उतने नाम सामने आ रहे हैं. कुछ दिन पहले महिला नेता को इस पद पर बैठाये जाने की हवा उड़ी. चार नामों को मजबूती के साथ रखा गया, लेकिन अब एक बार फिर हवा बदली है. अब पार्टी सूत्रों का दावा है कि कोई संगठन का ही आदमी पार्टी की कमान संभालेंगे. बीजेपी के अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गयी है.
क्यों हो रहा चुनावः
मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल जनवरी 2023 में समाप्त हो चुका है, लेकिन लोकसभा चुनाव 2024 को देखते हुए उनका कार्यकाल जून 2024 तक बढ़ाया गया था. कई राज्यों में नए प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति हो गयी है. सूत्रों की माने तो जुलाई 2025 के अंत तक नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल सकता है. कुछ सूत्रों का कहना है कि 19 जुलाई तक घोषणा हो सकती है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्रा से लौटने का इंतजार हो रहा है.
चुनाव कमिटी की बैठकः
भाजपा ने राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के लिए एक चुनावी कमिटी बनाई है. सूत्रों की माने तो वो पिछले दो दिनों से काफी सक्रिय है. गुरुवार को इससे संबंधित एक बैठक भी हुई. पार्टी सूत्रों के मुताबिक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और बीजेपी नेतृत्व के बीच नए अध्यक्ष के नाम पर सहमति बनना बाकी है. कई नाम चर्चा में हैं, लेकिन अभी तक किसी एक नाम पर अंतिम मुहर नहीं लगी है.
किन समीकरण को साधा जा रहाः
बीजेपी नए अध्यक्ष के चयन में संगठनात्मक अनुभव, क्षेत्रीय संतुलन और जातीय समीकरणों को ध्यान में रख रही है. उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में यादव जाति के वोटरों को साधने के लिए भूपेंद्र यादव का नाम चर्चा में है. इसके अलावा, दक्षिण भारत में पार्टी की पैठ बढ़ाने के लिए दक्षिण भारतीय नेताओं के नाम पर भी विचार किया जा रहा है.
महिला अध्यक्ष के नाम पर विराम क्योंः
कुछ दिन पहले पहली महिला राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाये जाने की चर्चा थी. लेकिन सूत्रों की माने तोआरएसएस ने इस पर आपत्ति जताई. संघ का मानना है कि अध्यक्ष को संगठन में व्यापक अनुभव और बड़ी जिम्मेदारी निभाने की क्षमता होनी चाहिए, जिसके अभाव में महिला नेताओं के नाम खारिज हो गई.
बीजेपी और आरएसएस की बैठकः
इससे संबंधित बैठकों की बात करें तो बीजेपी और इसके वैचारिक संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के बीच नए अध्यक्ष के चयन को लेकर कई उच्च-स्तरीय बैठकें हुई हैं. इन बैठकों में पार्टी नेतृत्व और आरएसएस के बीच समन्वय पर जोर दिया गया है. सूत्रों के अनुसार,पिछले दिनों बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने दिल्ली में आरएसएस के पदाधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन पर चर्चा हुई.
संभावित उम्मीदवारों के नामों पर विचारः
इस बैठक में पार्टी के रणनीतिकारों ने संभावित उम्मीदवारों के नामों पर विचार-विमर्श किया. इस साल की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागपुर में आरएसएस मुख्यालय का दौरा किया था. इस दौरे को बीजेपी और आरएसएस के बीच नए अध्यक्ष के चयन को लेकर चल रही बातचीत के हिस्से के रूप में देखा गया. हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, जेपी नड्डा, और संगठन महासचिव बीएल संतोष के बीच एक उच्च-स्तरीय बैठक हुई, जिसमें नए अध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने पर चर्चा हुई.
पहले भी हो चुकी है बैठकः
2024 में भी कई बैठकें हुई थीं, जिनमें राजनाथ सिंह के आवास पर अमित शाह, जेपी नड्डा, और आरएसएस के दत्तात्रेय होसबोले जैसे नेताओं ने हिस्सा लिया था. इन बैठकों में नए अध्यक्ष के लिए संभावित नामों पर विचार किया गया. नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए कई नाम चर्चा में हैं, जिनमें अनुभवी संगठनकर्ता, पूर्व मुख्यमंत्रियों, और महिला नेताओं के नाम शामिल हैं.
प्रमुख दावेदारों के नामः
सूत्रों की मानें तो पार्टी अध्यक्ष की दौड़ में कई नाम शामिल हैं. इनमें प्रमुख रूप से मनोहर लाल खट्टर, मध्य प्रदेश पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय शिक्षा मंत्री और ओडिशा से सांसद धर्मेंद्र प्रधान और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के नाम हैं.
सुनील बंसल बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव और उत्तर प्रदेश में सरकार बनवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नेता और बीएल संतोष, जो दक्षिण भारत से ताल्लुक रखने वाले संगठन महासचिव हैं. ‘मिशन साउथ’ का चेहरा भी बनाया जा सकता है.
इनके अलावे महिला उम्मीदवार के रूप में निर्मला सीतारमण का नाम भी चर्चा में है. उनके अलावा वानति श्रीनिवासन जो तमिलनाडु की नेता और कोयंबटूर दक्षिण से विधायक हैं. दक्षिण भारत से उनकी पृष्ठभूमि और संगठनात्मक अनुभव उन्हें ‘मिशन साउथ’ के लिए उपयुक्त बनाता है.
अध्यक्ष के चुनाव में क्यों हो रही देरीः
पार्टी सूत्रों की माने तो पार्टी ने अपने संविधान के तहत 36 में से 29 राज्य इकाइयों में संगठनात्मक चुनाव पूरे कर लिए हैं, जो राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के लिए आवश्यक कोरम पूरा करने के लिए पर्याप्त हैं. लेकिन, उत्तर प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, हरियाणा और पंजाब जैसे प्रमुख राज्यों में प्रदेश अध्यक्षों के चुनाव अभी बाकी हैं, जिसके कारण राष्ट्रीय अध्यक्ष की नियुक्ति में देरी हो रही है.
लोकसभा चुनाव 2024 और उसके बाद हुए विधानसभा चुनावों के कारण संगठनात्मक चुनावों पर ध्यान कम रहा. पार्टी ने पहले इन चुनावों को प्राथमिकता दी, जिसके चलते राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया में देरी हुई.
कुछ राज्यों, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में नए प्रदेश अध्यक्ष के चयन में देरी के कारण पार्टी के अंदर कुछ तनाव की खबरें भी सामने आई हैं. उत्तर प्रदेश में मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी का कार्यकाल समाप्त हो चुका है. वहां अभी तक पार्टी नए अध्यक्ष का नाम तय नहीं कर पाई है.





