जितना फ़र्क मधुमक्खी और ततैया में होता है, उतना ही अंतर है क्रमशः भाजपा और कांग्रेस में

हमारी धरती पर ना जाने कितने ही जीव पाए जाते हैं। सभी जीवों की अपनी-अपनी खासियत और विशेषता होती है। मगर इंसान इस धरती का सबसे ताकतवर जीव माना जाता है। और जीवों की तरह हर इंसान में भी अलग-अलग विशेषतायें होती हैं। कोई अच्छा इंसान होता है, तो कोई बुरा। इंसानी गुणों को देखते हुए समय-समय पर इंसान की तुलना अन्य जीवों से भी होती रही है। लेकिन जब कुछ इंसानों का स्वाभाव जीवों से मेल खाता है, तो वो दूसरों के लिए मिसाल बन जाता है। तभी तो हम कसी की तुलना शेर से करते हैं, तो किसी की गीदड़ से। किसी की कुत्ते से करते हैं, तो किसी की बिल्ली से। किसी की खरगोश से करते हैं, तो किसी की कछुए से। आज हम ऐसे ही लोगों की बात करने वाले हैं।

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Image: कांग्रेसी नेता अशोक गहलोत, राहुल गांधी और सचिन पायलट.

मर्यादा और एकता की विचारधारा की धज्जियाँ उड़ा रहे कांग्रेसी

ये तो हम सब जानते हैं, राजस्थान में आगामी 7 दिसम्बर को विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018 के मद्देनजर, जिधर देखो उधर राजनीतिक चर्चा और सियासी दांव-पेचों की बात हो रही है। हर कोई राजनीति में दिलचस्पी ले रहा है। विधानसभा चुनावों का फायदा हर कोई उठाना चाहता है। जिसे देखो वो अपनी रोटियां सेकने में लगा है। इन सब हरकतों में सबसे आगे है, कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस के नेता। ये बात तो हम आये दिन न्यूज़ चैनल और समाचार पत्रों में पढ़ते और देखते भी हैं। कांग्रेस पार्टी में लम्बे सिरे अंदरूनी कलह चल रही है। कांग्रेस के नेता कभी बूथ कार्यक्रम में एक दूसरे से झगड़ा करते दिखाई देते हैं, तो कभी टिकिट की दावेदारी प्रस्तुत करने के लिए राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में ही हंगामा कर देते हैं। प्रदेश की मर्यादा और एकता की विचारधारा की धज्जियाँ उड़ा रखी है। तभी तो रोज रोज कांग्रेस के नेता उल जुलूल बयान भी देते रहते हैं।

लेकिन क्या आपको पता है, ये ऐसा क्यों करते हैं? क्योंकि कांग्रेस पार्टी अब पहले जैसी नहीं रही। कांग्रेस पार्टी ततैया का घर बन चुकी है, और कांग्रेसी नेताओं की आदत ततैया के जैसी हो गयी है। जिस तरह ततैये के छत्ते में कई सारे ततैये एक साथ नहीं रह सकते। वैसे ही कांग्रेस के नेता भी कभी एक साथ मिल-जुल कर नहीं रह सकते। आज़ादी के बाद से ही कांग्रेस अंग्रेजों की तरह भारत पर हुकूमत करती आयी है। इन्होंने देश में फूट डालो राज करो की नीति अपनायी और देश पर शासन किया। लेकिन कांग्रेस की फूट डालो राज करो की विचारधारा की वजह से ही कांग्रेस में हमेशा से ही आतंरिक कलह भी होती रहे है। कांग्रेस के नेता ततैयों की भाति लड़ते और ज़गड़ते रहते हैं। और जिस तरह से ततैये अपने छत्ते में सिर्फ कीड़े मार-मार कर रखते हैं और खाते हैं। ठीक उसी तरह कांग्रेस के नेता भी जनता के साथ कड़े मकोड़ों जैसा व्यवहार करते हैं, तथा जनता को लूट-लूट कर खाते हैं।

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Image: मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे.

वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी है। जिसने राजस्थान सहित पूरे देश में एकता की एक अनूठी मिशाल पेश की है। एक भारत, श्रेष्ठ भारत। जैसी विचारधार रखने वाली पार्टी पूरे देश को एकता के एक सूत्र में पिरोते हुए विकास पथ पर आगे बढ़ाते जा रही है। वैसे तो भाजपा शासित हर प्रदेश धीरे-धीरे एकता के धागे में मजबूती से बंधते जा रहे हैं। लेकिन एकता का सबसे श्रेष्ठ उदाहरण राजस्थान में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने पेश किया, वो ना केवल राजस्थान में बल्कि हिंदुस्तान के किसी भी राज्य में देखने को नहीं मिलेगा। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने राजस्थान में 36 के 36 कौम को एक साथ लेकर राजस्थान का समग्र विकास किया है।

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जिस तरह मधुमक्खी के छत्ते में एक रानी मक्खी पूरे छत्ते की मधुमक्खियों को एकता का पाठ पढ़ा कर छत्ते के सभी सदस्यों को एक साथ रखती है। कभी भी अपने छत्ते पर कोई मुसीबत नहीं आने देती। सभी सदस्यों का ख़याल रखती है। उस छत्ते में खुशहाली रहती है, शहद की कोई कमी नहीं रहती है। ठीक उसी तरह राजस्थान की यशस्वी मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने राजस्थान प्रदेश की जनता को मधुमक्खी के छत्ते की भांति एक राज्य, एक परिवार के रूप में स्थापित किया है। रानी माता ने जनता की सभी मुश्किलों को दूर किया। एक माँ ही जान सकती है, कि संतान को क्या चाहिए। और वो सब अपनी जनता के लिए उपलब्ध कराया। अपनी प्रजा की हर बात मानी और उनकी सभी मांगों को पूरा किया। रानी माता वसुंधरा राजे के प्रयासों से आज पूरा राजस्थान मधुमक्खी के छत्ते की तरह एक परिवार है। जहाँ सिर्फ और सिर्फ शहद की मिठास है। कोई कड़वाहट नहीं।

राजस्थान में अगर कोई कड़वाहट फैला रहा है तो वो है कांग्रेस और कांग्रेस के नेता। कांग्रेस के नेता बात-बात पर झूठ बोलकर जनता को वर्तमान सरकार के खिलाफ भड़काने की पूरी कोशिश में हैं। इसलिए कभी गरीबों के नाम पर, कभी किसानों के नाम पर, कभी बेरोजगारी के नाम पर, महिलाओं के नाम पर तो कभी कर्मचारियों के नाम पर झूठ बोल-बोल कर सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। लेकिन राजस्थान की जनता ने इस बार तय कर लिया है। आगामी राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018 में कांग्रेस के ततैयों को उनके छत्ते समेत उखड फेकना है। तभी राजस्थान हमेशा के लिए एक संगठित और सर्वगुण संपन्न राज्य बन पायेगा।

 

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