news of rajasthan

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राजस्थान में इन दिनों स्वाइन फ्लू अपने पैर तेजी से पसारता जा रहा है। कई जतन करने के बाद भी इस पर कंट्रोल नहीं हो रहा। हर दिन के साथ स्वाइन फ्लू के पॉजिटिव मरीजों की संख्या में न केवल वृद्धि हो रही है बल्कि पिछले 8 सालों में जनवरी में सबसे अधिक केस अब तक आ चुके हैं। सरकार के बंदोबस्त भी अब तक नाकाफी रहे हैं। सरकारी आंकड़ों पर एक नजर डाले तो महज 11 दिनों में प्रदेशभर में 23 से ज्यादा मौते हो चुकी हैं। 25 से अधिक आईसीयू में हैं​ जिनमें 4 की हालत खराब है। अभी तक 603 पॉजिटिव केसों की भी पुष्टि हुई है। इसके दूसरी ओर, इन सभी आंकड़ों से बेखबर गहलोत सरकार केवल बैठकें आहूत कराने में लगी हुई है। राज्य में हालत खराब है और सरकार अभी तक केवल ‘किसानों का ऋण कैसे और कितना माफ किया जाए’ इस पर बहस कर रही है।

राजस्थान चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा भी इस मामले में ज्यादा एक्टिव नहीं लग रहे। हाल में जयपुर में राहुल गांधी की सभा में आए हुए कुछ लोग वापसी में दुर्घटना का शिकार हो गए थे। उस समय रघु शर्मा उनके हालचाल पूछने के किए पूरे दल-बल और मीडिया टीम के साथ वहां पहुंचे थे। वहीं जब स्वाइन फ्लू ने पूरे प्रदेश को अपने आगोश में लपेट रख है, रघु शर्मा ने एक कदम तक अस्पतालों में नहीं रखा और न ही कोई सरकारी सहायता की बुनियाद रखी।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गृह जिले जोधपुर के हालात ही सबसे अधिक खराब हैं। यहां 39 केस पॉजिटिव आए हैं जबकि दूसरे नंबर पर राजधानी जयपुर हैं जहां 28 केस पॉजिटिव है। शेष जिलों में ऐसे केसों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इन सभी से बेखबर सरकार की ओर से इस संबंध में बैठकें तो प्रतिदिन हो रही हैं लेकिन धरातल स्तर पर कार्य नहीं हो रहा। अस्पतालों में न जांच सुविधाएं उपलब्ध हो पा रही हैं और न ही संक्रमण रोकने के उपाय। भयावहता के हालात यह बयां करने के लिए काफी है कि 6 डॉक्टर और 13 नर्सिंग स्टाफ खुद बिमारी की चपेट में है और शेष स्टाफ का वेक्सीनेशन तक नहीं हुआ है।

जनवरी महीने में पड़ रही कड़ाके की ठंड में स्वाइन फ्लू का संक्रमण अधिक तेजी से फैल रहा है और लोगों को चपेट में ले रहा है। हमारी तो चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा और अन्य कांग्रेस के आला नेताओं के साथ आला अधिकारियों से यही दरखास्त है कि कृप्या अपने सरकारी आवासों से थोड़ा निकले और अस्पतालों का हाल जरा जांचे। क्या पता आपके इस अथक परिश्रम से एक व्यक्ति की ही जान बच पाए।

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