राजस्थान के राजसमन्द जिले की किस्मत बदल रहा सोलर डीएफयू संयंत्र

बुनियादी लोक सेवाआें और सुविधाओं के विकास और विस्तार के लिहाज से राजस्थान में जो उपलब्धियां हाल के वर्षों में हासिल की गई हैं वे अपने आपमें अपूर्व एवं ऎतिहासिक हैं। लोग सच्चे मन से यह स्वीकार करने से नहीं चूकते कि मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे की मंशा के अनुरूप राजस्थान अब चौतरफा और दीर्घकालीन विकास के उस सुनहरे दौर में प्रवेश कर चुका है जहां आम जन से लेकर हर वर्ग और क्षेत्र स्वस्थ विकास और खुशहाली का प्रतीक हो चला है।

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जिले की सोलर डी-फ्लोरिडेशन यूनिट

राजसमन्द जिले में 225 सोलर डीएफयू संयंत्र संचालित प्रदेश का राजसमन्द जिला भी विषम भौगोलिक स्थितियों वाला वह क्षेत्र है जहां दूरदराज के ऊंचे-नीचे पहाड़ों, दुर्गम घाटियों आदि से भरे हुए क्षेत्रों में बिजली की पहुंच आसान नहीं है वहीं इन पहाड़़ी क्षेत्रों में जमीनी जल स्रोतों में फ्लोराइ की मात्रा अधिक होने की वजह से फ्लोरोसिस की आशंका भी बनी रहती है। इन हालातों को देखते हुए राज्य सरकार ने इन ग्रामीण इलाकों की जरूरतों को भाँप कर ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल मुहैया कराने का जो प्रयोग आजमाया है, वह ग्रामीणों को खूब भाने लगा है।

राजसमन्द जिले में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिक विभाग द्वारा फ्लोराइ प्रभावित जल गुणवत्ता वाले विभिन्न ग्रामों एवं मजरों में 225 सोलर डी-फ्लोरिडेशन यूनिट स्थापित किये गये हैं। पंचायत समिति भीम में 69, देवगढ़ 40, आमेट 55, कुम्भलगढ़ 18, राजसमंद 9, रेलमगरा 29 व खमनोर में 6 सोलर डीएफयू स्थापित हुए हैं। पचास हजार की आबादी हो रही लाभान्वित ये सामुदायिक जल शुद्धि संयंत्र सोलर ऊर्जा से ऑटोमेटिक संचालित है। इनके लिए बिजली लाइन की जरूरत नहीं पड़ती बल्कि सूर्य के प्रकाश से प्राप्त ऊर्जा से ये चल रहे हैं।

सोलर बिजली से इन संयंत्रों से ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध हो रहा है। वर्तमान में राजसमन्द जिले में इन संयंत्रों की बदौलत लगभग 50 हजार की आबादी लाभान्वित हो रही है। ये सभी प्लांट स्वचालित हैं, सौर ऊर्जा आधारित पंप लगा होने से सुबह 8 बजे से सांय 6 बजे तक चलता है, इसमें 5 हजार लीटर की प्लास्टिक की टंकी लगाई है, जिससे ग्रामीणों को 24 घण्टे पानी उपलब्ध रहता है। टंकी के पानी में से फ्लोराइड की मात्रा कम करने के लिए डी-फ्लोरीडेशन संयंत्र लगाया गया है। इसके माध्यम से पानी सार्वजनिक नल में आता है। इस प्लांट में 4 नल लगाये गये हैं, जिसमें से 2 पीने के पानी के लिए तथा शेष 2 अन्य उपयोग के लिए हैं। इन्हें नीले एवं लाल रंग से चिह्नित किया गया है।

मोबाइल से होती है निगरानी

इस प्लांट मेंं यू वी प्रोटेक्शन यंत्र भी लगाया गया है, जिससे डीफ्लोरीडेशन के साथ-साथ जीवाणु रहित शुद्ध पेयजल उपलब्ध होता है। इसकी मॉनिटरिंग के लिये रिमोट मॉनिटरिंग युनिट लगाई गई है, जिससे मोबाइल के माध्यम से प्लांट पर होने वाली समस्त तकनीकी गतिविधियों की निगरानी रखी जाती है। रात्रि में रोशनी के लिये सोलर एलईडी लाइट भी लगाई गई है। प्लांट में किसी कारण खराबी होने पर दुरस्ती के लिये टोल फ्री नम्बर संचालित है, जिसे वहां आमजन की सुविधा के लिये प्रदर्शित किया गया है। इस पर सूचित करने पर 24 घण्टे में प्लांट ठीक कर दिया जाता है।

इनका कहना है …

सौर ऊर्जा चलित संयंत्रों की ओर बढ़ा रुझान जनस्वास्थ्य अभियांत्रिक विभाग के अधीक्षण अभियन्ता निर्मल चित्तौड़ा बताते हैं कि जिले में इस तरह के संयंत्र लगने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल उपलब्धता का लाभ बड़ी संख्या में ग्रामीणों को मिलने लगा है तथा इन संयंत्रोंं की आशातीत सफलता एवं उपादेयता के कारण आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी अब सौर ऊर्जा चलित पेयजल संयंत्राें की ओर रुझान बढ़ा है। भरी गर्मियों के मौजूदा दौर में ये संयंत्र ग्रामीणों के लिए जल समस्या का समाधान करने के साथ ही गांवों से आवागमन करने वाले लोगों के लिए भी उपयोगी सिद्ध हो रहे हैं।

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