राजस्थान की बेटियां देश-विदेश में बढ़ा रही हैं मान: सीएम वसुंधरा राजे

राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने शुक्रवार को नई दिल्ली के चाणक्यपुरी में बू्रकिंग्स इंस्टीट्यूट इंडिया सेन्टर में उर्वशी साहनी द्वारा लिखित ‘रीचिंग फॉर द स्काई-एम्पॉवरिंग गर्ल्स थ्रू एजुकेशन’ पुस्तक का लोकार्पण करते हुए कहा कि कि, राज्य सरकार ने बालिकाआें की शिक्षा को बढ़ावा देने और महिला स्वावलम्बन के लिए पिछले चार वर्षों में भरसक प्रयास किये हैं, जिसके परिणामस्वरूप सुदूर आदिवासी क्षेत्र की लड़कियां भी देश-विदेश में अपने आपको स्थापित करने में सफल होकर प्रदेश का गौरव बढ़ा रही हैं। सीएम राजे ने बताया कि हमने राज्य की हर ग्राम पंचायत स्तर पर सीनियर सैकेण्डरी स्कूल की सुविधा प्रारंभ की है। इससे पहले 2013 में प्रदेश की 60 प्रतिशत ग्राम पंचायतों में ऐसे स्कूल नहीं थे, जिनके कारण बड़ी संख्या में बालिकाएं 10वीं के बाद पढ़ाई बीच में ही छोड़ देती थीं।

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                                             ‘रीचिंग फॉर द स्काई-एम्पॉवरिंग गर्ल्स थ्रू एजुकेशन’ पुस्तक का लोकार्पण करते हुए.

सीएम ने कहा, बेटियों को यह सुविधा दे रही राजस्थान सरकार: मुख्यमंत्री राजे ने बताया कि बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकारी स्कूलों में साइकिलों एवं ट्रांसपोर्ट वाऊचर्स का वितरण तथा निःशुल्क सेनेटरी नैपकिन्स सहित कई सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। तीन लाख से अधिक बालिकाओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। प्रतिभावान छात्राओं के लिए गार्गी पुरस्कार की शुरुआत की गई है, जिससे अब तक 8 लाख से अधिक बालिकाओं को सम्मानित किया जा चुका है। राजश्री योजना के तहत परिवार में बालिका के जन्म से लेकर 12वीं क्लास तक की शिक्षा तक का खर्चा उठाने के लिए विशेष राशि दी जा रही है, जिसका लाभ अब तक 6 लाख से अधिक बालिकाओं को मिला है। उन्होंने आगे कहा कि इन सभी प्रयासों से प्रदेश में साक्षरता की दर में निरंतर वृद्धि हो रही है।

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लेखिका साहनी की पुस्तक को बताया समाज के लिए प्रेरणास्पद: सीएम राजे ने पुस्तक लॉन्चिंग के अवसर पर कहा कि, शिक्षा से जीवन मे बदलाव को केंद्र में रखकर साहनी ने बहुत ही प्रशंसनीय काम किया है, जो संपूर्ण समाज के प्रेरणादायक रहेगा। कार्यक्रम के प्रारंभ में किताब की लेखिका ने पुस्तक की विषय-वस्तु पर प्रकाश डाला। संस्थान के अधिशाषी निदेशक डॉ. हर्षवर्धन सिंह और शिक्षाविद वृंदा स्वरूप ने भी अपने विचार रखे। इस अवसर पर बालिका शिक्षा पर एक लघु-फिल्म का प्रदर्शन और पैनल वार्ता का आयोजन भी किया गया।

 

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