जयपुर में लगाये जाएंगे ई-वेस्ट के लिए कियोस्क, देश में पहली बार की जा रही अनूठी पहल

राजस्थान की राजधानी जयपुर में एक अनूठी पहल की शुरूआत होने जा रही है। दरअसल, जयपुर में इलेक्ट्रोनिक वेस्ट यानी ई-वेस्ट से छुटकारा पाने के लिए अनोखे कियोस्क खोले जाएंगे। ऐसा देश में पहली बार होगा जब जयपुर में ई-वेस्ट कियोस्क की शुरूआत होगी। इलेक्ट्रोनिक वेस्ट से निजात पाने के लिए देश में अभी तक कहीं भी इस तरह कियोस्क का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। दुनियाभर के देशों में पहले से ई-वेस्ट से निजात पाने के लिए कई तरह के प्रयोग किए जा रहे हैं। प्रदेश में इससे पहले 2011 में पॉलीथीन के कैरी बैग्स पर प्रतिबंध लगाकर एक अनूठी पहल शुरू की थी। अब इलेक्ट्रोनिक वेस्ट से छुटकारे के लिए भी प्रदेश की राजधानी में अनोखे कियोस्क खोले जाएंगे।

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File-Image: जयपुर में लगाये जाएंगे ई-वेस्ट के लिए कियोस्क, देश में पहली बार की जा रही अनूठी पहल.

पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन और इंस्टा केश ने बनाई योजना

देश में पहली बार पहल करते हुए जयपुर ने इलेक्ट्रोनिक वेस्ट मामले में ऐसे ई-वेस्ट रीसाइकिल कियोस्क लगाने की योजना बनाई है। जिसके तहत आमजन अपने पुराने ई-वेस्ट को रीसाइकिल कियोस्क पर अच्छे दामों में बेच सकेगा। राजस्थान पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन और इंस्टा केश ने मिलकर ये योजना बनाई है। योजना के तहत इंडियन ऑयल के जयपुर में स्थित 19 पेट्रोल पम्पों पर ऐसे कियोस्क लगाये जाएंगे। यहां कोई भी अपना इलेक्ट्रोनिक वेस्ट आसानी से बेच सकेग। इसके अलावा आईओसी के इन पेट्रोल पंप पर प्लास्टिक बैग जमा करवाकर जूट के बैग मुफ्त लेने की भी सुविधा होगी। इससे प्रदेश में इलेक्ट्रोनिक वेस्ट की समस्या से छूटकारा पाने में मदद मिलेगी।

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पिछले सात वर्षों में लगभग 5 गुना बढ़ी ई-वेस्ट की मात्रा

गौरतलब है कि केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नई दिल्ली द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार वर्ष 2005 में देश में जनित ई-वेस्ट की कुल मात्रा 1.47 लाख मी. टन थी। वह वर्ष 2012 में बढ़कर लगभग 8 लाख मी. टन हो गई। इससे यह तो साफ हो गया कि भारत में इलेक्ट्रोनिक वेस्ट की मात्रा पिछले सात वर्षों में लगभग 5 गुना हो गई है और इसमें लगातार वृद्धि हो रही है। राजस्थान में हर साल 20 हजार टन ई-वेस्ट पैदा हो रहा है। एक अनुमान के अनुसार प्रदेश में इलेक्ट्रोनिक वेस्ट का सालाना आंकड़ा 20 हजार टन से अधिक है।

 

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