राजस्थान सरकार की एमजेएसए योजना ने बदली भीलवाड़ा की मंजू कंवर की तकदीर

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वर्तमान बीजेपी राजस्थान सरकार गरीबों और किसानों के लिए अपार सफलता लेकर आई है। दर्जनों सफलता की कहानी और किस्से यहां मौजूद हैं। इसी लिस्ट में भीलवाड़ा की रहने वाली मंजू कंवर की कहानी भी जुड़ गई है। राजस्थान सरकारी की चलाई जा रही मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान (एमजेएसए) योजना ने मंजू की न केवल किस्मत बदली, बल्कि उसके और उसके परिवार के लिए समृद्धि के चारों द्वार भी खोल दिए। मंजू की बदली किस्मत देखकर उसके गांव के अन्य किसानों को भी एमजेएसए योजना का ख्याल आ रहा है और वह दिन दूर नहीं जब उन सबकी तकदीर भी मंजू की तरह बदलने लगेगी।

यह सफल कहानी है राजस्थान के भीलवाड़ा जिले की माण्डलगढ़ पंचायत समिति के धामनिया गांव की। यहां मंजू कंवर राजपूत ने अपने खेतों में गेहूं और चना की बुआई कराई किन्तु कुए में पानी की कमी के कारण जरूरत के मुताबिक सिंचाई नहीं हो पाई। जिसके चलते दाना पकते समय ही गेहूं की फसल सूख गई और जितनी अपेक्षा थी उतनी उपज तक न मिल सकी। इस घटना ने मंजू और उसके पूरे परिवार का मनोबल तोड़ सा दिया। इसके बाद मंजू और उसके परिवार ने इलाके के कृषि पर्यवेक्षक से बात की और उन्हें राजस्थान सरकार की मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान व इसके फायदों के बारे में जानकारी मिली।

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फिर क्या था, मंजू ने अपने खेत में 1200 घनमीटर क्षेत्रफल का फार्म पौण्ड खुदवाया। इस कार्य में 1.08 लाख रूपए की लागत आई जिसमें से उसे कृषि विभाग की ओर से 52.5 हजार रूपए का अनुदान प्राप्त हुआ। खुद मंजू अपनी जुबानी बताती हैं कि पहली ही बारिश में फार्म पौण्ड में पानी आ जाने की वजह से उनके कुएं में 10 फीट पानी आ भर गया, जिससे भूमिगत जल स्तर तथा जमीन की आद्रता भी बढ़ गई। उसने इसी दौरान अपने खेतों में मक्का और सोयाबीन की एक हैक्टेयर में बुआई की। पानी की मौजूदगी और पर्याप्त सिंचाई की वजह से उसके खेत में फसलें लहलहा उठी एवं उसके गरीब के दिन खत्म हो गए।

मंजू वसुंधरा सरकार और राजस्थान सरकारी की चलाई जा रही मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान (एमजेएसए) को चमत्कार समझकर धन्यवाद देती हैं। मंजू का कहना है कि अगर यह अभियान न होता तो आज उसका खेत और साथ में उसका चेहरा भी मुरझाया हुआ होता, लेकिन अब ऐसा नहीं है। उसका चेरा भी उतना ही खिला हुआ है जितना उसका खेत। मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान से उसका पूरा परिवार खुश है और इस सुकून को न वह भूल पायेगी और न उसका परिवार।

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