जनता में सुगबुगाहट है, कहीं कांग्रेस राजस्थान को दिवालिया ना कर दे!

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राजस्थान में विधानसभा चुनावों के परिणाम को आये हुए लगभग तीन दिन और 72 घंटे पूरे होने को हैं, लेकिन कांग्रेस ने अभी तक मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा नहीं की है। कांग्रेसी नेताओं से पूछने पर बताया जा रहा है, जो नाम आलाकमान तय करेगी वही व्यक्ति राजस्थान का मुख्यमंत्री बनेगा। इससे एक सवाल मन में उठता है। क्या राजस्थान के साढ़े सात करोड़ लोगों का भविष्य अगले पांच साल के लिए एक परिवार के माँ, बेटे, बहन और जीजा के हाथों में है? क्या वो 99 विधायक जिन्हें जनता ने चुनकर अपनी समस्याओं का समाधान करने के लिए विधानसभा में भेजा है, उनकी कोई अहमियत नहीं? या फिर कांग्रेस आलाकमान उनको इस लायक नहीं समझती? क्या यही कांग्रेस पार्टी की विचारधारा है? कि बस कैसे भी करके एक बार सत्ता हाथ में आ जाये फिर तो जो हम चाहेंगे वही करेंगे।

ये तो एक बात हुयी। राजस्थान में कांग्रेस मुख्यमंत्री किसको बनाएगी? अगर कांग्रेस इस समस्या को हल कर लेती है, तो भी क्या कांग्रेस सफलता पूर्वक अपनी सरकार चला पायेगी? क्योंकि जिस तरह से कांग्रेस के नेताओं में शीत युद्ध चल रहा है। वो मुख्यमंत्री को काम करने देंगे! क्या वो मुख्यमंत्री की बात मानेंगे? या फिर अपनी मनमानी करेंगे। इस सब घटनाओं को देखते हुए लग रहा है, राजस्थान के आने वाले पांच साल संभावनाओं वाले नहीं, असंभावनाओं भरे हो सकते हैं। कांग्रेस पार्टी में अब तक जो भी हो रहा है, वो कभी भी आशातीत नहीं था। फिर वो चाहे कांग्रेस का चुनावों में जीतना हो, चाहे कांग्रेस का टिकट वितरण करना हो या फिर अभी राजस्थान से लेकर दिल्ली तक चल रहा अप्रायोजित मनोरंजक कार्यक्रम। हर बार कांग्रेस ने जनता के सामने अपना अच्छा प्रभाव छोड़ने के बजाय जनता को हंसने का मौका दिया है।

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मगर फिलहाल तो राजस्थान के प्रत्येक मतदाता के मन में एक ही प्रश्न है। कांग्रेस अपने वादों पर खरी कैसे उतरेगी? कैसे वो जनता से किये गए वादों को पूरा कर पायेगी? क्योंकि एक तरफ तो कांग्रेस चुनाव पूर्व रैलियों में झूठ बोलती आयी है, कि भाजपा सरकार ने राजस्थान के सरकारी खजाने पर बड़ा क़र्ज़ भार डाल दिया है। ऐसे में कांग्रेस राजस्थान के क़र्ज़ को चुकायेगी या फिर राजस्थान की जनता की समस्यायों को हल करेगी। इसके अलावा राजकीय काम-काज होंगे सो अलग। अब कांग्रेस के पास दो ही रास्ते हो सकते हैं। या तो कांग्रेस और क़र्ज़ लेकर अपनी सरकार चलाएगी या फिर स्पष्ट तौर पर अपने वादों से मुकर जाएगी। अगर कांग्रेस अपने सभी वादों को पूरा करती है। जैसे किसानों की सम्पूर्ण क़र्ज़ माफ़ी। बेरोजगारी भत्ता। राजस्थान की सभी लड़कियों को हमेशा के लिए मुफ्त शिक्षा। किसानों को सही समर्थन मूल्य। किसानों को मुफ्त बिजली। हर गांव में बिजली। और राजस्थान की जनता को सभी मूलभूत सुविधायें मुफ्त में देना। तो फिर राजस्थान सरकार के पास इतना बजट आएगा कहां से? इस बात का अनुमान कोई आम आदमी भी लगा सकता है। कांग्रेस अगले पांच सालों में राजस्थान को दिवालिया करने के कगार पर पहुंचा देगी।

ऐसे हालत में एक बार फिर जनता चौपालों पर चर्चा कर रही है, जनता का मंथन चल रहा है, और भले ही 1 प्रतिशत ही सही जनता के मन कहीं ना कहीं एक हूक सी उठ रही है, कि क्यों ना कांग्रेस की रार से भला भाजपा की गठबंधन की सरकार बना दी जाये। ताकि बड़ी मुश्किल से पटरी पर आया राजस्थान तरक्की की राह पर दौड़ लगाए। वरना कांग्रेस तो फिर से राजस्थान को शुरू से शुरू कर देगी।

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