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राजस्थान विधानसभा चुनावों से पहले कई बड़े-बड़े चुनावी वादों से भरे अपने घोषणा पत्र के दम प्रदेश की सत्ता हासिल करने वाली राजस्थान कांग्रेस सरकार पूरजोर से अपने वादे पूरे करने में लगी हुई है। इस घोषणा पत्र में बेरोजगारी भत्ता, कर्जमाफी, एक रुपए किलो के हिसाब से बीपीएल को गेंहू जैसे कई वादे शामिल ​थे। अब इन सभी योजनाओं को पूरे करने के लिए गहलोत सरकार ने अन्य योजनाओं की चाल को धीमी कर दिय है। दरअसल इन सभी चुनावी घोषणाओं का पैसा जुटाने के लिए पीडब्लूडी, पीएचईडी, ऊर्जा, कृषि व सिंचाई विभाग की बड़ी योजनाओं पैसा देने की रफ्तार इतनी धीमी कर दी है कि ये योजनाएं करीब-करीब ठप हो गई हैं। इन विभागों ने सड़क, पानी, बिजली सिंचाई व सब्सिडी से जुड़ी योजनाओं के भुगतान रोक दिए गए हैं।

इंदिरा गांधी नहर परियोजना और वाटर सेक्टर री-स्ट्रक्चरिंग प्रोजेक्ट में तो दिसम्बर महीने में एक रुपया तक खर्च नहीं हो पाया है। द्रव्यवती नदी प्रोजेक्ट का हाल तो किसी से भी छिपा नहीं है।

कछुआ चाल से चल रही इन प्रमुख योजनाओं में केंद्रीय सड़क निधि, स्टेट रोड डवलपमेंट फंड, धौलपुर लिफ्ट परियोजना, परवन, इंदिरा गांधी नहर परियोजना जैसी कई बड़ी परियोजनाएं शामिल हैं। उक्त सभी योजनाएं​ पिछली राजस्थान  भाजपा सरकार द्वारा शुरू की गई थीं। हालात यह है कि पीड्ब्ल्यूडी, नाबार्ड और स्टेट रोड डवलपमेंट फंड सहित तीनों योजनाओं में दिसम्बर महीने में केवल 50 करोड़ रुपया खर्च हो पाया है जो पूर्व खर्च का एक फीसदी तक भी नहीं है। वहीं 1100 करोड़ रुपए की परवन योजना में नवंबर तक 822 करोड़ रुपए खर्च हुए थे लेकिन कांग्रेस ने दिसम्बर महीने में इस लाभ योजना में केवल एक करोड़ रुपया खर्च किया है। इंदिरा गांधी नहर परियोजना और वाटर सेक्टर री-स्ट्रक्चरिंग प्रोजेक्ट में तो दिसम्बर महीने में एक रुपया तक खर्च नहीं हो पाया है। द्रव्यवती नदी प्रोजेक्ट का हाल तो किसी से भी छिपा नहीं है।

इनका कहना है

राजस्थान के पूर्व यूडीएच मंत्री और छबड़ा से मौजूदा विधायक प्रतापसिंह सिंघवी ने कहा कि प्रदेश में सरकार ने नए काम रोक दिए हैं। दिसंबर के बाद जो भी काम हुए उनका भुगतान नहीं हुआ हैं। पीएचईडी, पीडब्लूडी जैसे निर्माण विभागों में सारे काम ठप पड़े हैं। अफसरों को सरकार कह रही है कि जो भी काम चल रहे हैं उनकी गति धीमी कर दो ताकि फिलहाल पैसे का भुगतान नहीं करना पड़े।

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