2 दिन का है इंतजार, फिर एक ही मैदान में दो-दो हाथ करते दिखेंगे मोदी और राहुल

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी का एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कोई नई बात नहीं है। पिछले चुनावों से ही यह काम बदस्तूर जारी है। फिर चाहे वह राफेल हो या किसानों को बांटी जा रही कर्जमाफी, सभी तरफ यही सुर सुनाई दे रहे हैं। अब समय आया है आमने-सामने आकर दो-दो हाथ करने का। अब दोनों एक ही मैदान में दंगल करते नजर आएंगे। बस फर्क यह होगा कि यह घमासान संसद में नहीं बल्कि आसमान में होगा। हम बात कर रहे हैं 14 जनवरी को मकर संक्रांति पर लड़ने वाले पंतगों के पेचों की। इस बार मार्केट में मोदी और राहुल गांधी के चित्रों की पतंगें धडल्ले से बिक रही हैं। चूंकि अभी राफेल मुद्दा और किसान कर्ज माफी मुद्दा खाफी सुर्खियों में है इसलिए ज्यादातर पतंगों पर मोदी-राहुल के साथ कर्जमाफी और राफेल के ही प्रिंट दिखाई दे रहे हैं। इनमें से कुछ पतंगों की हाईट मोदी व राहुल की लंबाई के अनुसार भी है जो 5 से 6 फुट तक लंबी हैं।

इस तरह की पतंगों को बनाने की महारथ हासिल है शहर के हांडीपुरा इलाके के अब्दुल गफ्फूर अंसाल को जिन्हें राजनेताओं की पतंगे बनाने का शौक ही नहीं जूनून है। पतंग बनाना इसका खानदानी पेशा है। यहां तक की कई लोग आॅर्डर के मुताबिक राजनेताओं की पतंगें यहां तैयार कराते हैं। चूंकि आने वाले समय में लोकसभा चुनाव है, इसलिए इन पतंगों की खासी डिमांड है।

अब्दुल भाई पिछले 36 सालों से राजनेताओं की पतंगें बनाने का धंधा कर रहे हैं। जयपुर नगरी के खास पतंगबाज यहां खास तौर पर आते हैं और अपने मन-मुताबिक और पसंद के राजनेताओं और अभिनेताओं की पतंग बनाने का आॅर्डर देते हैं। अब्दुल भाई को इस तरह की पतंगे बनाने में 3 से 4 दिन का समय लगता है। बीते 36 साल से इस तरह की करामती पतंगों को बनाने के तौर पर उनकी शहर में खास पहचान है। अब तक अब्दुल भाई प्रधानमंत्री मोदी और राहुल गांधी के अलावा लालू यादव, अरविंद केजरीवाल और अखिलेश यादव सहित अरूण जेटली जैसे नेताओं की पतंगे भी बना चुके हैं।

पतंगों से देते हैं संदेश

अब्दुल भाई केवल राजनेताओं और अभिनेताओं की पतंग ही नहीं बनाते। वह जागरूकता का संदेश देने वाली पतंगे भी डिजाइन करते हैं। अपनी पतंगों के माध्यम से वह पल्स पोलियो अभियान, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और बाल विवाह रोकने जैसे संदेश शहरवासियों तक पहुंचाते हैं। उनका मानना है कि जब पतंग कटकर किसी के हाथ में पहुंचती है तो वह एक बार इसे जरूर देखेगा। शायद इसी से उस पर विचार कर सकेगा।

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