वो डायलॉग तो सुना ही होगा... क्यों थक रहे हो

हिंदुस्तान की ऐतिहासिक कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी, राफेल मुद्दे से इस प्रकार चिपक गए हैं, जिस प्रकार कोई जोंक किसी जानवर से चिपक जाती है। दोनों में समानता भी उतनी ही है। जोंक के लिए जानवर अपना शिकार होता है, और राहुल गांधी के लिए भाजपा शिकार है। मगर इस गिरी हुई हरकत के बाद भी कांग्रेस के नेता मानने को तैयार नहीं है कि भाजपा सरकार को सर्वोच्च न्यायालय ने राफेल मामले में क्लीन चिट दे दी है। अब ये बात अलग है कि सत्ता हथियाने के लिए राहुल गांधी क्लीन चिट का मतलब समझने की कोशिश भी नहीं कर रहे है।

वो डायलॉग तो सुना ही होगा… क्यों थक रहे हो

पहले अपने दामन के दाग तो हटा लें :

हमें इससे कोई आपत्ति नहीं की राहुल गांधी और कांग्रेस को क्या समझ में आता है और क्या नहीं। हमें इससे भी कोई आपत्ति नहीं कि कांग्रेस, भाजपा सरकार के ख़िलाफ़ घोटाला करने का आरोप लगा रही है। हमें आपत्ति इस बात से है। एक तो सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद भी राहुल गांधी लगातार उसकी अवहेलना किये जा रहे हैं। प्रतिदिन, रात-दिन, राफेल-राफेल चिल्ला रहे हैं। चिल्लाओ, ख़ूब चिल्लाओ। गला फाड़कर के चिल्लाओ। कुतुबमीनार पर चढ़कर चिल्लाओ मगर झूठ मत चिल्लाओ। साथ में उन घोटालों के बारे में भी तो चिल्लाओ जो यूपीए सरकार ने 10 सालों तक हिंदुस्तान में किये। आज कांग्रेस वाले कहते हैं कि कहीं आग लगी है, तभी तो धुंआ उठ रहा है। तो कांग्रेस सरकार में तो घोटालों के शोले भड़के थे, जिनकी आग में देश आज भी झुलस रहा है। दूसरा ये कि कांग्रेस जिस प्रकर से इस मामले को तूल दे रही है, उसको देखते हुए तो यही लग रहा है, की ये सिर्फ़ और सिर्फ़ भाजपा सरकार के विरुद्ध जनता को भड़काने की साज़िश है। तभी तो पहले सीबीआई जांच, फिर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी कांग्रेस तीसरी जांच करवाने की जिद पर अड़ी है। अगर भाजपा सरकार उस जांच में भी पाक-साफ़ निकल गयी तो कहीं महान नेता श्रीमान राहुल गांधी फिर एफबीआई से जांच करवाने की मांग ना उठा ले।

Scams in India under Congress Rule

चलो जांचों तक तो मामला ठीक है जनता को भी समझ में आता है। मगर राहुल गांधी में इतनी भी बुद्दि नहीं कि किसी महिला के बारे में किस प्रकार बोलना है। जब प्रधानमंत्री बोलते थे, तो चिल्लाते थे… सिर्फ़ प्रधानमंत्री बोल रहे है। रक्षामंत्री जवाब नहीं दे रही है, रक्षामंत्री जवाब नहीं दे रही है। जब रक्षा मंत्री ने मुहतोड़ जवाब दिया तो फिर चिल्लाने लगे प्रधानमंत्री ने तो एक महिला को आगे कर दिया, ख़ुद उसके पीछे जाकर छुप गए। फिर कहते हैं, कहां है 56″ इंच की छाती वाला। हद है यार…! या तो इनकी खोपड़ी पूरी तरह से खली है, या फिर इनकी खोपड़ी में भूसा भरा हुआ है। मतलब खुद किसी एक बात पर नहीं टिकते और दूसरों पर आरोप लगाने चले हैं।

शर्म करो कांग्रेसियों…  शर्म करो! राजनीति के अंदर त्योहारों को मत घुसेड़ो :

अब तो कांग्रेस देश की जनता को बांटने पर तुली हुई है। कैसे भी करके देश के लोगों को तोड़ दो इनको आपस में लड़ा दो, अपना काम सिद्ध हो जायेगा। कांग्रेस इतनी नीच हरकत करेगी ये किसी ने सोचा भी नहीं था। पहले तो राहुल गांधी व अन्य कांग्रेसी नेता सिर्फ़ जन सभाओं में ही, मौख़िक रूप से भाजपा सरकार पर आरोप लगते थे। लेकिन अब तो ये भाजपा के ख़िलाफ़ आरोपों के पोस्टर और बैनर लगाकर अराजकता फ़ैलाने की कोशिश कर रहे हैं। सबसे घिनौनी हरकत तो कांग्रेस की ये लगी की कांग्रेस ने अपनी घटिया राजनीति के चक्कर में हिंदू त्योहारों को भी लपेट लिया। कांग्रेस मकर संक्रांति पर राफेल मुद्दे से जुड़े झूठे आरोपों की छपी हुई पतंग जनता को बांट रही हैं। ताकि जनता में गलत भावना फैले। अर्थात तीन राज्यों की सत्ता मिलते ही कांग्रेस ने भाजपा के ख़िलाफ़ दुगनी गति से ज़हर उगलना शुरू कर दिया। कांग्रेस की ये हरकत बेहद ही शर्मनाक और ओछी है।

एक बलात्कारी से और क्या उम्मीद की जा सकती है:

राहुल गांधी, रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण के खिलाफ़ बोलकर अपने आप को बड़ा तीस मार ख़ान समझ रहे होंगे मगर ये बात कैसे भूल गए कि एक महिला गर अपना रौद्र रूप धारण कर ले तो फिर स्वयं ईश्वर भी उसके कोप का भाजक होने से नहीं बच सकता फिर ये तो एक अदना सा इंसान है। ये वही कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी है जिसने 12 साल पहले 6 दिसंबर 2006 को अपनी ही पार्टी के वरिष्ठ नेता बलराम सिंह की 24 वर्षीय बेटी सुकन्या के साथ बलात्कार किया था। वो भी अपने विदेशी मित्रों के साथ मिलकर सामूहिक बलात्कार। फिर मामला उजागर होने पर सत्ता का ग़ैर क़ानूनी प्रयोग कर पीड़िता के पूरे परिवार को गायब करवा दिया। अरे अगर इतनी ही हिम्मत है तो संसद में आमने सामने बैठ कर बहस करो ना यूँ जनता के बीच में झूठ बोलकर क्या हासिल कर लोगे। जब लोकसभा में राहुल गांधी ने रिकॉर्ड टेप चलाने की इजाज़त मांगी तो लोकसभा अध्यक्ष ने उसकी पूरी ज़िम्मेदारी अपने ऊपर लेने को कहा तो फिर राहुलवा ने ज़िम्मेदारी क्यों नहीं ली। बस बकर-बकर करते रहते हैं। जो खुद एक बलात्कारी हो वो किसी महिला की क्या इज्ज़त कर सकता है।

आज राहुल गांधी राफेल पर गला फाड़-फाड़ कर चिलाने के बजाय हिंदुस्तान में हो रहे बलात्कारों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाते तो शायद हिंदुस्तान की जनता उनके साथ खड़ी हो जाती। मगर वो तो सरकार बनाने के चक्कर में इस क़दर अंधे और बहरे हो चुके हैं कि ना तो उन्हें कुछ दिखाई दे रहा हैं और ना ही कुछ सुनाई दे रहा है। राफेल और एक महिला के ख़िलाफ़ बोलने से अच्छा अगर राहुल गांधी महिलाओं पर हो रहे  बलात्कार और अत्याचारों के खिलाफ आवाज़ उठाते तो हिंदुस्तान की सारी लड़कियां उन पर मर मिटती मगर अफ़सोस की बात है कि राहुल गांधी तो स्वयं एक बलात्कारी पुरुष हैं।

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Author : Mahendra

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