पॉलीमर फ्लड तकनीक से निकलेगा बाड़मेर में तेल, दुनिया में पहली बार अपनाई जाएगी यह तकनीक

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बाड़मेर में तेल के खनन के लिए अब पॉलीमर फ्लड तकनीक प्रयोग में ली जाएगी। दुनिया में पहली बार इस तकनीक का उपयोग किया जाने वाला है। पॉलीमर फ्लड तकनीक से फायदा यह होगा कि इससे 10 से 15 प्रतिशत अतिरिक्त तेल निकाला जा सकेगा। फिलहाल यहां से 1.75 बैरल क्रूड आॅयल प्रतिदिन निकाला जा रहा है जिसे अब 5 लाख बैरल तक करने का लक्ष्य रखा गया है। ऐसे में 50 हजार बैरल तक अतिरिक्त तेल इस तकनीक के प्रयोग के बाद निकाला जा सकेगा। योजना पर काम भी शुरू हो गया है।

35 हजार करोड़ का होगा निवेश

जानकारी के अनुसार इस योजना पर 35000 करोड़ रूपए का निवेश होगा। पहले चरण में 12 हजार करोड़ के निवेश से प्रतिदिन 3 लाख बैरल क्रूड आॅयल का उत्खनन हो सकेगा। इस प्रक्रिया में 3 साल लगेंगे। अगले दो सालों में 5 लाख बैरल तक प्रतिदिन तेल निकाला जा सकेगा। योजना पर कार्य करते हुए केयर्न एनर्जी ने तीन अन्य कंपनियों के साथ प्रथम चरण में 250 कुएं तलाशने शुरू कर दिए हैं।

क्या है पॉलीमर फ्लड तकनीक

धोरों और जमीन के नीचे की चट्टानों में छुपे तेल का निकालने के लिए तेल के कुएं के पास में ही एक अन्य कुआं खोदा जाएगा। यह एक इंजेक्शन वेल होगा। इसमें गर्म पानी व ऐसे पदार्थ मिलाए जाएंगे जो बहुलक की संरचना करे। इसके प्रभाव से इंजेक्शन वेल का पानी पड़ौस के तेल के कुएं तक पहुंचेगा और चट्टानों में फंसा तेल भी बाहर आ जाएगा।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

क्रूड उत्खनन से जुड़े लोगों का मानना है कि 25 प्रतिशत तक तेल चट्टानों के भीतर से निकलता है। इस तकनीक से 35 से 40 प्रतिशत तक तेल बाहर आने की उम्मीद है। इस तरह से 10 से 15 प्रतिशत तक की यह अतिरिक्त उपलब्धि काफी मायने रखती है।

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