मनरेगा मजदूर का सपना हुआ साकार, बेटा बनेगा डॉक्टर

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अपने परिवार के साथ कृष्ण कुमार।

धोलपुर के रहने वाले कृष्ण कुमार के माता-पिता जोकि मनरेगा के तहत मजदूरी करते हैं, उनका सपना अब जाकर साकार होता दिख रहा है। आर्थिक तंगी के बीच पढ़े कृष्ण ने नीट परीक्षा पास कर अपना हुनर अपने गांव और जिले सहित देशभर को दिखाया है। जिले की सखवाड़ा पंचायत के रहने वाले कृष्ण के पिता मुन्नालाल खुद 5वीं तक पढ़े हैं जबकि उसकी मां अशिक्षित है। नीट (NEET 2018) की परीक्षा पास करने वाला कृष्ण अपने गांव का पहला छात्र है। अपने बेटे की सफलता पर मुन्नालाल का कहना है, ‘मेरे लंबे समय से प्रतीक्षित सपना सच हो गया है। मुझे गर्व है कि मेरा बेटा मेरे पंचायत में पहला डॉक्टर होगा।’

कृष्ण ने नीट में 3099 आॅल इंडिया रैंक प्राप्त की है जबकि ओबीसी में उसकी 911वीं रैंक है। उसने परीक्षा में 580 अंक अर्जित किए हैं।

कृष्ण कुमार की सफलता के लिए प्रदेश की मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे ने बधाई देते हुए कहा है, ‘कृष्ण कुमार सभी राजस्थानियों के लिए एक प्रेरणा है। हमें इस तरह के एक प्रतिभावान और प्रतिभाशाली युवा व्यक्ति होने पर गर्व है। तुम्हारे उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएं।’

कृष्ण कुमार का कहना है कि एमबीबीएस पूरा करने के बाद वह एक कार्डियक सर्जन बनना चाहता है क्योंकि उसने देश में हृदय रोग विशेषज्ञों की कमी के बारे में सुना है।

जैसा कि खुद कृष्ण कुमार ने बताया कि उसकी शिक्षा की यात्रा कठिनाईयों से भरी थी। वह हिन्दी माध्यम की माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूली शिक्षा के लिए गांव से 20 किमी दूर जाता था। रात में गांव में बिजली न होने की वजह से वह लालटेन की रोशनी में पढ़ाई करता था और यहीं से मिली सफलता ने उसके हैसलों को पंख दिए। तीन साल पहले, कृष्ण ने घर छोड़ नीट की तैयारी करने के लिए कोटा शहर की राह पकड़ी। हालांकि वह दो पूर्व प्रयासों में विफल रहा, फिर भी उनकी दृढ़ संकल्प हर विफलता के साथ मजबूत हो गया। तीसरे प्रयास में उन्होंने मेडिकल कॉलेज में प्रवेश करने का अपना सपना हासिल किया।

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