National Road Safety Week 2019
राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह 2019, 4 फ़रवरी से 10 फ़रवरी

वर्ष 1983 में मनमोहन देसाई, प्रयाग राज निर्देशित एवं अमिताभ बच्चन, रति अग्निहोत्री अभिनीत एक फ़िल्म आयी थी क़ुली। और इसी फ़िल्म का गाना है, “न तूने सिग्नल देखा, न मैंने सिग्नल देखा ,एक्सीडेंट हो गया,रब्बा रब्बा…!”  उस साल 14th नवंबर, 1983 को ये गाना रिलीज़ हुआ था और 2 दिसंबर को फ़िल्म। भले ही प्यार और रोमांच के जरिये ही सही, इस गाने में यातायात व सड़क सुरक्षा नियम तोड़ने पर होने वाले शारीरिक, मानसिक और आर्थिक नुक़सान को भली भांति चित्रित किया गया है।

वही काम हमारी सरकार हर साल करती है। लेकिन हम हैं कि कसम खाये बैठे हैं। ना तो कभी हम यातायात नियमों का पूरी तरह से पालन करेंगे और ना ही सुरक्षित वाहन चालन। क्योंकि हमारी जिंदगी तो हमारी है, हम चाहे जैसे भी जियें। जब हमें ही हमारी परवाह नहीं तो सरकार कौन होती है चिंता करने वाली। भारतीय सरकार राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह का आयोजन तो सिर्फ़ जनता का मनोरंजन करने के लिए करती है ना। इसलिए आप भी ये गाना सुनिए और अपना मनोरंजन कर लीजिये। फिर आगे की बात करेंगे।

क्या है सड़क सुरक्षा:

भारत कृषि प्रधान देश तो है ही। लेकिन दूसरा सबसे बड़ा व्यवसाय परिवहन ही है। जो रोज़गार उपलब्ध करवाता है। जिसके मुख्य कारक है वाहन चालक। फिर भी आज के समय में वाहन चालकों को सम्मान की नज़र से नहीं देखा जाता। बशर्ते वो सरकारी ड्राइवर ना हो। जब ये चालक एक जगह से दूसरी जगह पर सामान लेकर जाते हैं, तो हमारी राष्ट्रीय सांस्कृतिक एकता का परिचय भी देते हैं। हमारे देश में वाहन चालन प्रशिक्षण की कोई उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण अधिकतर चालक अपने आप ही ड्राइविंग सीखते हैं। जिससे वो वाहन चलाना तो सीख जाते हैं, किन्तु उन्हें कभी पूरे यातायात और सुरक्षा नियमों की जानकारी नहीं होती। जिसका परिणाम है कि आज 90% से अधिक सड़क दुर्घटनाएं मात्र वाहन चालकों की अनभिज्ञता और लापरवाही की वजह से होती हैं।

इसलिए ये आज के समय की जरूरत बन गयी है कि किसी भी चालक को सड़क पर वाहन चलाने से पूर्व, सड़क की भाषा का ज्ञान हो। सभी चालकों को रोड सिग्नल, रोड साईन, रोड मार्किंग, रोड फ़र्नीचर के साथ-साथ अन्य सड़क उपयोगकर्ताओं के हक़ों, सड़क नियमों को तोड़ने के अपराध पर मिलने वाली सजा, सड़क विनियमों, सड़क दुर्घटनाओं के कारणों, उपायों तथा दुर्घटना के समय स्वयं की भूमिका और दायित्वों का ज्ञान होना अति आवश्यक है।

सबसे पहले कसम क्योंकि सबका जीवन अमूल्य है:

एक वक़्त था जब हम स्कूलों में देश के प्रति प्रतिज्ञा लेते थे। आज हमें सड़क सुरक्षा के लिए प्रतिज्ञा लेनी पड़ रही है। लेकिन जिस काम को करने में अपना ही भला हो उसे ज़ोर-ज़बरदस्ती भी कर लेना चाहिए। तो शुरू करें…

एक ज़िम्मेदार ड्राइवर के नाते मैं शपथ लेता हूँ कि…

  • मैं हमेशा सीट बेल्ट पहनूंगा।
  • मैं कभी पीली रेखा पार नहीं करूँगा।
  • मैं लेन के अनुशासन का पालन करूँगा।
  • मैं कभी शराब पीकर ड्राइव नहीं करूँगा।
  • मैं कभी तेज गति से वाहन नहीं चलाऊंगा।
  • मैं सड़क के सभी सिग्नलों का पालन करूँगा।
  • मैं आँखों की नियमित रूप से जांच करवाऊंगा।
  • मैं क्लच का सदूपयोग कर ईंधन की बचत करूँगा।
  • मैं सभी यात्रियों के साथ मित्रवत और सहायक रहूँगा।
  • मैं थका हुआ, तनावग्रस्त होने पर ड्राइव नहीं करूँगा।
  • मैं ड्राइव करते समय कभी फ़ोन पर बात नहीं करूँगा।
  • मैं हॉर्न निषेधित क्षेत्रों में हॉर्न का इस्तेमाल नहीं करूँगा।
  • मैं वाहन को स्वस्थ रखूँगा जिससे पर्यावरण प्रदूषित ना हो।
  • मैं कभी सड़क पर विपरीत दिशा से ओवरटेक नहीं करूँगा।
  • मैं हमेशा ड्राइविंग लाइसेंस व अन्य ज़रूरी दस्तावेज़ों को साथ रखूँगा।
  • मैं वाहन का दुरूपयोग नहीं करूँगा और उसकी अच्छे से देखभाल करूँगा।
  • मैं हमेशा एम्बुलेंस और अग्निशामक वाहन को पहले जाने के लिए जगह दूंगा।
  • मैं कभी बीच सड़क खड़ा नहीं होऊंगा और ना ही सह यात्रियों से बहस करूँगा।
  • मैं हमेशा सभी राहगीरों और सड़क पर घूमने वाले आवारा पशुओं का ध्यान रखूँगा।
  • मैं सड़क और यातायात के समस्त नियमों का पूरी निष्ठा और लगन के साथ पालन करूँगा।

सड़क पर चलने के नियम:

हमने सड़क नियम पालन की कसम तो खा ली। लेकिन ये भी तो जाने की वो नियम कौन कौन से हैं। तो सड़क नियम मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं। पहला रोड सिग्नल और दूसरा रोड साईन।

रोड सिग्नल:

सड़क पर चलने के लिए सड़क की अपनी भाषा होती है। जिसे रोड सिग्नल कहते हैं। ये सड़क की मूक भाषा होती है। जिसकी सम्पूर्ण जानकारी प्रत्येक वाहन चालक होना अनिवार्य है। रोड सिग्नल के भी 3 प्रकार होते हैं।

  1. ड्राइवर द्वारा हाथ से दिए जाने वाले सिग्नल

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ड्राइवर द्वारा हाथ से दिए जाने वाले सिग्नल
  • वाहन धीमा करने के लिए ड्राइवर बाहर हाथ निकल कर इशारा देता है। जिसे दूसरे चालकों द्वारा समझ लिया जाता है।
  • वाहन को बांये घूमने के लिए बायीं तरफ हाथ का इशारा किया जाता है।
  • दांये घूमने के लिए दांयी तरफ हाथ का इशारा किया जाता है।
  • रुकने के लिए हाथ से रुकने का इशारा किया जाता है।
  • ओवरटेक करने के लिए हाथ से आगे जाने का इशारा किया जाता है।
  1. ट्रैफ़िक पुलिस द्वारा दिए जाने वाले सिग्नल

Road Signal Traffic Police Indicator
ट्रैफ़िक पुलिस द्वारा दिए जाने वाले सिग्नल
  • एक ओर से यातायात को रवाना करने के लिए ट्रैफ़िक पुलिस वाला व्यक्ति हाथ से उस ओर इशारा करता हैं।
  • सामने से आ रहे वाहनों को रोकने के लिए सामने हाथ से रुकने का इशारा किया जाता है।
  • पीछे से आ रहे वाहनों को रोकने के लिए पीछे हाथ से रुकने का इशारा किया जाता है।
  • पीछे और सामने से आ रहे वाहनों को एक साथ रोकने के लिए दोनों हाथो से एक साथ इशारा किया जाता है।
  • दांयी तरफ से आ रहे वाहनों को रोकने तथा बांयी तरफ से आ रहे वाहनों को मोड़ने के लिए दांये हाथ से रुकने व बाएं हाथ को मोड़ कर मुड़ने का इशारा किया जाता है।
  • सभी दिशाओं से आ रहे वाहनों को रोकने के लिए दोनों हाथों को ऊपर खड़ा कर रुकने का इशारा किया जाता है।
  • बांयी तरफ के यातायात को चालू करने के लिए बांये हाथ के चलने का इशारा किया जाता है।
  • दांयी तरफ के यातायात को चालू करने के लिए दांयी हाथ के चलने का इशारा किया जाता है।
  • सिग्नल बदलने के लिए दोनों हाथों को कोहनियों से मोड़कर इशारा किया जाता है।
  • तिराहे के यातायात को चालू करने के लिए एक हाथ को सामने और दूसरे हाथ को बगल में करके चलने का इशारा किया जाता है।
  1. ट्रैफ़िक लाईट द्वारा दिए जाने वाले सिग्नल

Road Signal Light Indicator
ट्रैफ़िक लाईट द्वारा दिए जाने वाले सिग्नल
  • ये सामान्यतः चौराहों पर यातायात को नियंत्रित करने के लिए लगायी जाती है। सभी को ट्रैफ़िक लाईट के अनरूप ही वाहन चलाने चाहिए। वाहन चालाक को जिस ओर जाना है, उस दिशा में सामने वाली ट्रैफ़िक लाईट का पालन करना चाहिए।
  • लाल लाईट का मतलब होता है, अपने वाहन को स्टॉप लाइन से पहले रोकें व पदयात्रियों को सुरक्षित जाने दें।
  • पीली लाईट का मतलब होता है, सचेत होना। अगर वाहन ने अपनी ओर की स्टॉप लाइन, पीली लाईट होने से पहले पार कर ली तो ही दूसरी ओर रास्ता पार करें वरना स्टॉप लाइन पर रुक जायें।
  • हरी लाईट का मतबल होता है, सावधानी पूर्वक आगे बढ़ें और अगर रास्ते में कोई पदयात्री हो तो पहले उसे जाने दें।

इस बार  सरकार द्वारा राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह 4 फ़रवरी से 10 फ़रवरी तक आयोजित किया जा रहा है। इस दौरान हम सड़क और यातायात के और नियमों के बारे में जानेंगे। तब तक सावधानी से चलें और सुरक्षित घर पहुंचें। क्योंकि घर पर कोई आपका इंतज़ार कर रहा है।

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