सिविल लाइंस के बाद मालवीय नगर में आयोजित मेरा बूथ मेरा गौरव में भिड़े कांग्रेसी

प्रदेश कांग्रेस पार्टी का महत्वकांक्षी मेरा बूथ मेरा गौरव सम्मेलन अब धीरे-धाीरे पार्टी प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट की गले की फांस बनता जा रहा है। जब भी कहीं यह सम्मेलन आयोजित होता है, वह हंगामा होना तय है। हाल ही में रविवार को सिविल लाइंस में टिकट दावेदारी को लेकर कांग्रेस जिला अध्यक्ष प्रतापसिंह खाचरियावास और पीसीसी सदस्य विजय शंकर तिवाड़ी के बीच गुटबाजी नजर आयी। अब जयपुर के मालवीय नगर में मेरा बूथ मेरा गौरव कार्यक्रम में टिकट के दावेदार नेता आपस में उलझ गए और बात धक्का-मुक्की तक पहुंच गई। बाद में अधिकारियों ने मामले को किसी तरह शांत कराया।

राजस्थान कांग्रेस का महत्वकांक्षी ‘मेरा बूथ मेरा गौरव’ सम्मेलन अब गौरव का नहीं बल्कि पार्टी प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट की गले की फांस बनता जा रहा है।

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सचिन पायलट, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष, राजस्थान

सिविल लाइंस में विजय शंकर तिवाड़ी व उनके समर्थकों को केवल इसलिए सम्मेलन में एंट्री नहीं दी गई क्योंकि समर्थकों ने तिवाड़ी के नाम की टी-शर्ट पहनी हुई थी। इसके बाद तिवाड़ी अपने समर्थकों के साथ सभा स्थल के बाहर धरने पर बैठ गए थे।

हुआ कुछ यूं कि सोमवार को मालवीय नगर विधानसभा के नंदपुरी रोड पर आयोजित मेरा बूथ मेरा गौरव कार्यक्रम आयोजित हुआ था। यहां कांग्रेस जिला अध्यक्ष प्रतापसिंह खाचरियावास भी उपस्थित थे। यहां कांग्रेस की चेयरपर्सन और कार्यक्रम आयोजक अर्चना शर्मा के समर्थकों ने उनके नाम की टी-शर्ट पहन रखी थी। इसका हिंडोली से पीसीसी सदस्य मोहित सोनी सहित अन्य नेताओं ने विरोध किया। इस पर अर्चना शर्मा और अन्य नेताओं के समर्थक आपस में भिड़ गए और एक दूसरे के खिलाफ नारेबाजी शुरू हो गयी।

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मालवीय नगर विधानसभा में मेरा बूथ मेरा गौरव कार्यक्रम के दौरान हुए हंगामे के बाद अर्चना शर्मा ने कहा कि कांग्रेस के प्रत्येक कार्यकर्ता को अपने विचार व्यक्त करने की छूट है। उन्होंने सोनी को कांग्रेस का माहौल खराब करने वाला बताया। वहीं मोहित सोनी का कहना है कि तीन दिन पहले जिलाध्यक्ष की मिटिंग में तख्ती लेकर आने या नाम लिखी टी-शर्ट पहनकर आने पर मनाही हो गयी थी। इसी बात का विरोध किया तो मुझे पार्टी से अगले 5 दिनों में सस्पेंड कराने की धमकी दी गयी।

अब कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष की असल परेशानी यह है कि इस गुटबाजी और शक्ति प्रदर्शन को आखिर रोके तो रोकें कैसे। आगामी विधानसभा चुनावों और बढ़ती टिकट की होड़ को देखते हुए ऐसा होना लाजमी है लेकिन आपसी नोकझोंक और द्ववेषपूर्ण बर्ताव कतई ठीक नही है। लेकिन कांग्रेस की राजनीति में स्थानीय नेताओं का शक्ति प्रदर्शन निश्चित तौर पर सचिन पायलट के घाव का नासूर बनता जा रहा है।

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