कांग्रेस का ‘मेरा बूथ, मेरा गौरव’ सम्मेलन चढ़ रहा गुटबाजी की भेंट

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ज्योति खंडेलवाल, कांग्रेस प्रदेश महासचिव

राजस्थान में कांग्रेस पिछला विधानसभा चुनाव हार चुकी है इसलिए पार्टी के हौसले पहले से पस्त हैं। ऐसे में कुछ महीनों पहले हुए उपचुनावों में तीन सीटें जीत कांग्रेस ने अपनी मजबूत राजनीति का दम भरा था। लेकिन अब ऐसा लगने लगा है कि कांग्रेस पार्टी के नेता और कार्यकर्ता अगले विधानसभा चुनावों की नहीं बल्कि किस तरह से आपस में लड़ा जाए, इसकी तैयारी कर रहे हैं। हाल में राजधानी जयपुर की किशनपोल सीट पर ‘मेरा बूथ, मेरा गौरव’ सम्मेलन के दौरान कांग्रेस प्रदेश महासचिव ज्योति खंडेलवाल एवं पूर्व सांसद अश्क अली टाक के बीच हुई खुली नोकझोक ने इस बात को साफ कर दिया है। एक ही पार्टी के दो नेताओं के बीच इस तरह की वारदात होना कांग्रेस के लिए कोई नयी बात नहीं है। इससे पहले भी शाहपुरा सहित कई अन्य शहरों में मेरा बूथ, मेरा गौरव सम्मेलन राजनीति का नहीं बल्कि मारपीट का अखाड़ा बन चुका है।

माहेतरमा आप विधायक बने अच्छी बात है लेकिन पहले आप अपना बूथ तो बचा लीजिए। आपको ध्यान होना चाहिए कि आप अपनी बूथ तक से हार चुकी हैं।’ असल में पिछले चुनाव में कांग्रेस ज्योति के बूथ से ही हार गई थी। – अश्क अली टाक

सोमवार को किशनपोल सीट पर कांग्रेस की नेता ज्योति खंडेलवाल और अश्क अली टाक मेरा बूथ, मेरा गौरव सम्मेलन में आपस में भिड़ गए। असल में ज्योति खंडेलवाल सीट पर स्थानीय प्रत्याशी को टिकट देने की बात पर अड़ रही थी। कांग्रेस मुख्यालय के बाहर किशनपोल में बाहरी उम्मीदवार को हटाने का बैनर लगाया और फिर सम्मेलन में स्थानीय का मुद्दा उठा दिया। इस पर कई कांग्रेस नेताओं ने मंच से ही ज्योति खंडेलवाल का आइडिया सिरे से खारिज कर दिया। अश्क अली टाक ने तो यहां तक कह दिया कि ‘माहेतरमा आप विधायक बने अच्छी बात है लेकिन पहले आप अपना बूथ तो बचा लीजिए। आपको ध्यान होना चाहिए कि आप अपनी बूथ तक से हार चुकी हैं।’ असल में पिछले चुनाव में कांग्रेस ज्योति के बूथ से ही हार गई थी।

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अशोक गहलोत Vs सचिन पायलट

अब आगामी विधानसभा चुनावों को 6 माह से भी कम समय बचा है, ऐसे में मेरा बूथ मेरा कार्यक्रम के दौरान टिकट की दावेदारी को लेकर कांग्रेस के स्थानीय नेताओं की बीच वर्चस्व की लड़ाई पार्टी नेतृत्व के लिए भी सिरदर्द बनती जा रही है। हालांकि पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट स्थानीय नेताओं की जुबानी जंग को हर तरह से रोकने का प्रयास करने के लिए बूथ दर बूथ दौरे कर रहे हैं लेकिन उनकी खुद की पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से अंदरूनी खींचतान इस मामले को और गर्मा रही है।

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