ग्रामीण महिला दिवस: ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने के लिए महिलाओं की भूमिका को याद करने का दिन

आज ग्रामीण महिला दिवस है। हर साल 15 अक्टूबर को संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतरराष्ट्रीय ग्रामीण महिला दिवस मनाकर ग्रामीण महिलाओं की भूमिका को याद किया जाता है। 15 अक्टूबर, 2008 को पहला अंतरराष्ट्रीय ग्रामीण महिला दिवस मनाकर मनाया गया था। उसके बाद से हर साल इस दिन खेती और ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने, खाद्य सुरक्षा सुधारने और गांवों में गरीबी मिटाने में ग्रामीण और मूल निवासी महिलाओं की भूमिका का सम्मान किया जाता है। ग्रामीण महिलाओं को समर्पित यह दिन निश्चित तौर पर भुखमरी और गरीबी को समाज से मिटाने के लिए इन महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए समाज की मांग को बुलंद करता है।

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अंतरराष्ट्रीय ग्रामीण महिला दिवस

जैसाकि सर्वविदित है, ग्रामीण महिलाएं विकसित और विकासशील देशों की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसका सीधा उदाहरण इस बात से मिलता है कि दुनिया के विकासशील देशों के कई भागों में वे फसल उत्पादन और पशुओं की देखभाल के साथ-साथ अपने परिवारों के लिए भोजन, जल और ईंधन की व्यवस्था भी करती हैं। इसके अलावा, ग्रामीण महिलाएं बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्ति की देखभाल भी करती हैं। यही वजह है कि केंद्र सरकार द्वारा इस वर्ष महिला कृषकों के सशक्तीकरण के लिए इस दिन को देश में महिला किसान दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया है।


महिलाओं की भागीदारी कृषि एवं इससे संबंधित क्षेत्रों में बहुत ज्यादा है, फिर भी किसान शब्द सुनने से हमारे मस्तिष्क में हमेशा पुरुष का प्रतिबिंब सामने आता है। वहीं अफ्रीकी देशों में भारत के उलट स्थिति है। वहां किसान शब्द कहने से लोगों के मस्तिष्क में महिला का ही चित्र आता है। भारत जैसे कृषि प्रधान देश में महिला किसानों की संख्या अभी करीब 14 प्रतिशत है। राजस्थान में यह आंकड़ा 10.1 प्रतिशत है। महिलाओं की भागीदारी आज खेती, बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन, मुर्गी पालन इत्यादि में 50 प्रतिशत से भी अधिक है। खरीफ में धान की रोपाई के समय अधिकांश खेतों में महिलाएं ही रोपाई करती दिखाई पड़ती हैं। यही स्थिति फल-सब्जियों की तोड़ाई तथा फसलों की कटाई में भी देखने को मिलती है। गांवों में पशुओं की देखरेख, उन्हें चारा देना तथा साफ-सफाई करना एवं दूध निकालना आदि अधिकांश कार्य महिलाओं द्वारा ही किया जाता है।

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महिला उत्थान को ध्यान में रखते हुए ही यह निर्णय भी लिया गया है कि महिलाओं की कृषि क्षेत्र में भागीदारी को पहचान एवं बढ़ावा देने के दृष्टिकोण से केंद्र सरकार द्वारा प्रत्येक कृषि विज्ञान केंद्र में एक महिला वैज्ञानिक तैनात किया जावे। राष्ट्रीय आजीविका मिशन के अंतर्गत प्रदेश में महिलाओं को फार्म मशीनरी बैंक योजना जिसमें ट्रैक्टर एवं अन्य उपकरणों के क्रय पर 80 प्रतिशत अनुदान मिलता है, के अंतर्गत प्राथमिकता प्रदान की जा रही है। हर साल 23 दिसंबर को आयोजित होने वाले किसान सम्मान दिवस के अवसर पर तीन सर्वश्रेष्ठ प्रगतिशील महिला कृषकों को सम्मानित भी किया जाता है।

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