राजस्थान एक बार फिर आरक्षण की आग में जलने के लिए ज्वालामुखी के मुहाने पर खड़ा है। कारण स्पष्ट है देशभर में चर्चित रहा गुर्जर आरक्षण आंदोलन। आंदोलन के मुखिया कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला ने 8 फरवरी से आंदोलन करने की घोषणा की है। आंदोलन की औपचारिक घोषणा करते हुए कर्नल ने कहा कि 7फरवरी तक सरकार ने अगर आरक्षण नहीं दिया तो 8फरवरी से हाईवे जाम कर आंदोलन की शुरूआत होगी।

मंगलवार को अजमेर के साईवाला में आयोजित महापंचायत में आंदोलन को लेकर घोषणा के साथ ही कर्नल का रौद्र रूप भी देखने को मिला। उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए कहा 69वर्षों से आप लोग राजस्थान में क्या कर रहे हों, जब केन्द्र सरकार सवर्णों का आरक्षण दे सकती हैं तो राज्य सरकार गुर्जरों से आरक्षण पर कोई बात क्यों नहीं कर रही है।

गुर्जर आंदोलन की घोषणा के साथ ही ये सुगबुगाहट भी चरम पर है कि अब पायलट इस सियासी घटनाक्रम से कैसे निपटेंगे। राजनीति के जानकारों का मानना है कि गहलोत सरकार की गुर्जरों से वार्ता नहीं करना अब पायलट के लिए मुसीबत खड़ा कर सकती है। वहीं, पायलट खेमें के लोगों ने नाम न उजागर करने की शर्त पर कहा कि— ये सब गहलोत की सोची समझी साजिश है। ऐसा करके गहलोत पायलट को जातीय उत्पात में फंसाना चाहते हैं। काबिलेगौर है कि राजस्थान में गुर्जर सहित पांच जातियों को ओबीसी के साथ-साथ एक प्रतिशत एसबीसी आरक्षण दिया जा रहा है। लेकिन, गुर्जर चाहते हैं कि उन्हें पांच प्रतिशत अलग से आरक्षण दिया जाएं।

गहलोत सरकार की नाकामी और खामोशी जनमानस के लिए परेशानी का सबब न बनें इसके लिए सूबे की कांग्रगेस सरकार को जल्द से जल्द कोई निर्णय लेकर इस आरक्षण की आग से पार पाना होगा।

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