राजस्थान में पिछले 6 दिन से चल रहा गुर्जर आरक्षण आंदोलन बदस्तूर जारी है। गहलोत सरकार ने गुर्जर आरक्षण बिल को विधानसभा में पेश कर दिया है। बीडी कल्ला ने सदन के पटल पर बिल पेश करने से पहले बयान दिया कि बिल प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।

बिल पेश होने के बाद भी गुर्जर रेलवे ट्रैक पर जमा है। गुर्जर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला, उनके बेटे विजय बैंसला, गुर्जर नेता और वकील शैलेन्द्र सिंह ने बिल पेश होने के बाद स्पष्ट तौर पर कह दिया है कि पहले हम विधानसभा में पेश किए गए विधेयक को देखेंगे। और हम संतुष्ट होने के बाद ही आंदोलन को समाप्त करेंगे। हम विधि और कानून के जानकारों से भी इस विधेयक पर चर्चा करेंगे कि जिससे बाद में किसी तरह की कोई परेशानी न जनता को हों और न हमारे समाज के लोगों को।

वहीं, सूबे के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि गुर्जर आरक्षण का मामला केन्द्र सरकार का है। केन्द्र सरकार ही इस पर कुछ कर सकती है। काबिलेगौर है कि भाजपा की वसुंधरा सरकार ने भी गुर्जरों की मांग के अनुसार उन्हें पांच प्रतिशत आरक्षण दिया था जिसमें एक प्रतिशत आरक्षण का लाभ गुर्जर समाज के लोगों को सरकारी नौकरी सहित प्रत्येक जगह मिलने लगा जो अब तक भी मिल रहा है। लेकिन शेष चार प्रतिशत का मामला कोर्ट में गया जिसे कोर्ट ने दायरे से बाहर बताकर खारिज कर दिया था।

आरक्षण बिल एक बार फिर विधानसभा में पेश तो हो गया है। लेकिन, इसका लागू होना मुश्किल नजर आ रहा है। सीएम गहलोत शुरू से ही इस मामले को केन्द्र का बताकर कन्नी काट रहे हैं। ऐसे में गुर्जरों का ट्रैक से हटना फिलहाल नामुमकिन है।

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