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मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला.

राजस्थान में पांच प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर गुर्जर समाज शुक्रवार से आंदोलनरत है। कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला के नेतृत्व में सवाई-माधोपुर के मलारना डूंगर में रेलवे ट्रैक पर बैठे गुर्जर आंदोलनकारियों से वार्ता करने के लिए एक दिन बाद प्रदेश की गहलोत सरकार ट्रैक पर पहुंच गई, लेकिन बात नहीं बन पाई है। गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति इस बार ट्रैक पर ही वार्ता करना चाहती है। जबकि सरकार चाहती है कि राजधानी जयपुर या अन्य किसी जगह पर बात की जाए। शनिवार को गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति से वार्ता करने के लिए गहलोत सरकार की ओर से गठित तीन मंत्रियों की कमेटी में शामिल पर्यटन मंत्री विश्वेन्द्र सिंह, आईएएस नीरज के. पवन के साथ पहले दौर की वार्ता करने धरना स्थल पर पहुंचे। सिंह ने गुर्जर नेताओं से बात की लेकिन बात नहीं बन पाई।

आंदोलन स्थल से बाहर बात करना चाहती है सरकार, लेकिन गुर्जर तैयार नहीं

पर्यटन मंत्री विश्वेन्द्र सिंह ने गुर्जर आंदोलनकारियों को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का संदेश दिया। उन्होंने सीएम गहलोत का समाज के नाम संदेश का हवाला देते हुए कहा कि इस मुद्दे पर बिन्दुवार चर्चा करने की जरुरत है। उन्होंने गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला से वार्ता करते हुए कहा कि आंदोलन स्थल पर बातचीत नहीं हो सकती। आप जहां चाहे वहां चुनिंदा प्रतिनिधियों के साथ आए सरकार बात करने के लिए तैयार है। पर्यटन मंत्री विश्वेन्द्र सिंह ने राजस्थान सरकार की ओर से रविवार को बातचीत करने का न्यौता दिया। सिंह ने कहा कि उन्हें गुर्जर समाज पर पूरा विश्वास है। समाज वार्ता करने के लिए न्यौता स्वीकार करेगा। जबकि गुर्जर आंदोलनकारी ट्रैक पर ही वार्ता करने के लिए अड़े हुए हैं। उनका कहना है कि समाज पहले ही कई बार धोखा खा चुका है। इसलिए इस बार वार्ता ट्रैक पर ही खत्म होगी।

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कर्नल बैंसला बोले, मैं यहीं बैठा हूं मुझे मजबूर मत करो

पर्यटन मंत्री विश्वेन्द्र सिंह की ओर से गहलोत सरकार द्वारा ट्रैक से दूर वार्ता के प्रस्ताव पर कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला ने कहा कि मैं यहीं बैठा हूं मुझे मजबूर मत करो। मंत्री सिंह के सम्बोधन के बाद गुर्जर आंदोलन संघर्ष समिति ने उनकी सलाह को खारिज करते हुए कहा कि जो बात होगी वो यहीं होगी। किसी दूसरी जगह पर बात करना अब संभव नहीं होगा। गौरतलब है कि कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव से पहले अपने चुनावी घोषणा पत्र में गुर्जरों को पांच प्रतिशत आरक्षण देने की बात कही थी। लेकिन अब गहलोत सरकार केन्द्र के पाले में गेंद डालने की बात कर रही है। अगर कांग्रेस सरकार ने जल्द ही वार्ता करके समाधान नहीं निकाला तो आंदोलन उग्र हो सकता है। ऐसे में इसका खामियाजा बेचारी जनता को उठाना पड़ेगा।

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