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गंगा दशहरा स्नान

हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी ज्येष्ठ माह की शुक्ल पक्ष की दशमी को गंगा दशहरा मनाया जाएगा, जोकि कल है। इस दिन गंगा का धरती पर हस्त नक्षत्र में अवतरण हुआ था। गंगा नदी को 10 तरह के पापों को हरने वाली माता माना गया है। इसी वजह से इसे गंगा दशहरा करकर संबोधित किया जाता है। इस वर्ष गंगा दशहरा 24 मई यानि कल पड़ रहा है। ज्योतिषशास्त्र की मानें तो इस बार गंगा दशहरा में गर करण, वृषस्थ सूर्य, कन्या का चन्द्र के अदभुत संयोग होने से यह पर्व अति महाफलदायक है। इस वर्ष गंगा दशहरा ज्येष्ठ अधिकमास में होने से पूर्वोक्त कृत्य शुद्ध की अपेक्षा मलमास में करने से अधिक फल होता है। इस बार योग विशेष का बाहुल्य होने से इस दिन स्नान, दान, जप, तप, व्रत, और उपवास आदि करने का बहुत अधिक महत्व है।

गंगा स्नान का विशेष महत्व

पुराणों के अनुसार इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व होता है इसलिए गंगाजी या पास में स्थिति किसी पवित्र नदी में स्नान और पूजन करने की परंपरा है। गंगा स्नान करते समय ‘ऊं नम: शिवाय नारायण्यै दशहरायै गंगायै नम:’ का जप करना चाहिए। इस दिन गंगा की विशेष पूजा अर्चना और भगवान शिव का जलाभिषेक किया जाता है। गंगा दशहरा पर दान और उपवास का बड़ा महत्व होता है। गंगा नदी 10 तरह के पापों का नाश करती है जिनमें तीन कायिक, चार वाचिक और तीन मानसिक पाप होते हैं।

कैसे करें पूजा

दशहरा के दिन काशी दशाश्वमेध घाट में दश प्रकार स्नान करके, शिवलिंग का दस संख्या के गन्ध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य और फल आदि से पूजन करके रात्रि को जागरण करें तो अनन्त फल होता है। पांच पुष्पाञ्जलि अर्पण करके गंगा को भूतल पर लाने वाले भगीरथ का और जहां से वे आयी हैं, उस हिमालय का नाम लेकर पूजन करे।

दान अवश्य करें

10 फल, 10 दीपक और 10 सेर तिल का ‘गंगायै नमः’ कहकर दान करे। साथ ही घी मिले हुए सत्तू और गुड़ के पिण्ड जल में डालें। 10 सेर तिल, 10 सेर जौ और 10 सेर गेहूं का दान किसी ब्राह्मण को करें। ऐसा करने से सब प्रकार के पाप समूल नष्ट हो जाते हैं और दुर्लभ सम्पत्ति प्राप्त होती है।

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